सुरजीत पुंढीर, अलीगढ़ : आइएसओ प्रमाणित कोल तहसील सूबेभर में नजीर बन गई है। अब अन्य तहसीलों को भी ऐसा ही बनाया जाएगा। राजस्व परिषद ने पहले चरण में 13 जिलों की 41 तहसीलों का चयन किया। इसमें अलीगढ़ की भी तीन शामिल हैं। इनके लिए बजट जारी कर दिया है। एक तहसील पर 35 से 40 लाख रुपये खर्च होंगे।

डॉ. पंकज वर्मा की मेहनत : सूबे में 2016 में सबसे पहले फीरोजाबाद सदर तहसील को आइएसओ प्रमाणपत्र मिला था। उस वक्त डॉ. पंकज वर्मा वहा के एसडीएम थे। प्रमाण पत्र मिला तो उनका अलीगढ़ तबादला हो गया। यहां की कोल तहसील में भी उन्होंने यह फॉर्मूला अपनाया। इशिता कंसल्टिंग के आजाद व पंकज माथुर को यहां की व्यवस्थाओं को सुधारने की जिम्मेदारी मिली। टीम ने यहां बायोमीट्रिक हाजिरी, व्यवस्थित ऑफिस, रिसेप्शन, शिकायत पेटिका, साफ-सफाई व दीवारों को वॉल पेंटिंग से सजाया। पार्किग, कार्यालय, मुख्य द्वार पर अफसरों व लेखपालों के नाम और फोन नंबर। पेयजल व शौचालय व्यवस्था। पावर बैकअप सहित फरियादियों के बैठने की व्यवस्था की गई।

योगी ने दिया प्रमाण पत्र : पिछले साल सीएम योगी ने यहां नुमाइश मैदान में आयोजित कार्यक्रम में एसडीएम कोल डॉ. पंकज कुमार वर्मा को तहसील कोल का आइएसओ प्रमाण पत्र दिया। उन्होंने कहा भी था कि अन्य तहसीलों को भी ऐसा ही बनाया जाएगा।

41 नई तहसीलों का चयन : अब13 जिलों की 41 तहसीलों को आइएसओ के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें कोल तहसील जैसी व्यवस्थाएं होंगी। कुछ दिन पहले लखनऊ में हुई बैठक में कोल तहसील को प्रोजेक्ट के तौर पर रखा गया था।

खैर, गभाना व इगलास : एक तहसील पर 35 से 40 लाख रुपये तक खर्च होंगे। बजट भी मिल गया है। प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। अलीगढ़ में खैर, गभाना और इगलास तहसील हैं। एसडीएम कोल को तीनों का नोडल अधिकारी बनाया गया है।

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इन जिलों की तहसीलों का चयन

अलीगढ़, बलिया, बाराबंकी, बांदा, बदायूं, बलरामपुर, कुशीनगर, मथुरा, महाराजगंज, मीरजापुर, हापुड़, संत रविदासनगर, भदोही, रायबरेली, रामपुर, श्रावस्ती, शामली, वाराणसी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, आजमगढ़ हैं।

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कोल तहसील के बाद जिले की तीन तहसीलों को भी आइएसओ प्रमाणित कराया जाएगा। व्यवस्थाओं के लिए शासन से बजट भी मिल गया है।

चंद्रभूषण सिंह, डीएम

Posted By: Jagran

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