जागरण संवाददाता, अलीगढ़ : सबसे मजबूत कानून बताए जाने वाले आरटीआइ (जन सूचना अधिकार) का भी अफसरों ने मजाक बना दिया है। ऐसा ही कुछ फसलीय ऋण मोचन योजना के तहत आयोजित किए कार्यक्रम में किसानों को लाने-लेजाने के लिए लगाई बसों से संबंधित सवाल मांगने पर सामने आया है। एक ही सवाल पर तीन विभागों ने बसों की अलग-अलग संख्या बताई है।

नुमाइश मैदान में आठ अक्टूबर को फसलीय ऋण मोचन योजना के तहत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें दो हजार के करीब किसानों ने शिरकत की थी। कृषि विभाग की तरफ से इन्हें लाने व लेजाने के लिए बसें भी लगाई गई थी। इस पर बीते दिनों मेलरोज निवासी आरटीआइ कार्यकर्ता केशवदेव शर्मा ने कृषि विभाग, परिवहन विभाग एवं आपूर्ति विभाग से इस कार्यक्रम में लगी बसों की संख्या एवं उन पर खर्च धनराशि मांगी थी। इनमें सभी विभागों से अब जवाब मिल गया। इनमें काफी चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। परिवहन विभाग ने जहां कार्यक्रम में कुल 108 बसें लगे होने की बात कही है, आपूर्ति विभाग ने 10 बसों के बारे में बताया। वहीं, कृषि विभाग ने 20 बसें लगे होने की जानकारी दी है। ऐसे में इसमें बड़ा घालमेल होने की आशंका जताई जा रही है। आरटीआइ कार्यकर्ता ने डीएम को पत्र लिखकर इस मामले में जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। कार्यकर्ता ने सवाल उठाया है कि ऐसा कैसे संभव है कि एक सवाल के अलग-अलग जवाब हों। इससे जवाब देने की मंशा और नीयत पर प्रश्नचिह्न उठता है। इस मामले की तहकीकात बहुत जरूरी है।

Posted By: Jagran

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