अलीगढ़ : शासन से सख्ती के बाद भी हड़ताल कर रहे लेखपालों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। डीएम चंद्रभूषण सिंह के निर्देश पर एसडीएम ने लेखपाल संघ के करीब 25 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। अन्य लेखपालों को भी बस्ते छीनने की चेतावनी दी है, ताकि पंचायत सचिवों व ग्राम विकास अधिकारियों से प्रमाणपत्रों का काम कराया जा सके।

लेखपाल संघ के तत्वावधान में आठ सूत्रीय मांगों को लेकर तीन जुलाई से लेखपाल कार्य बहिष्कार कर तहसीलों पर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। इससे लोगों के आय, मूल, जाति समेत अन्य प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे थे। शासन स्तर से कई उन्हें हड़ताल खत्म करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री योगी ने भी काम पर लौटने की अपील की। लेखपाल मानने को तैयार नहीं थे। सोमवार से लेखपालों ने जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। एडीएम प्रशासन आरएन शर्मा ने बताया कि जनता की दिक्कतों को देखते हुए डीएम ने सभी एसडीएम को लेखपाल संघ के पदाधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए। एसडीएम ने संघ के जिला व तहसील अध्यक्ष, मंत्री समेत अन्य पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। जिले में करीब 25 लेखपाल निलंबित किए गए हैं। पदाधिकारियों को निलंबित करने के बाद अन्य लेखपालों को चेतावनी दी गई है। उनसे बस्ते जमा करने को कहा गया है, जिससे पंचायत सचिवों व ग्राम विकास अधिकारियों से प्रमाणपत्रों का काम कराया जा सके।

लेखपाल हड़ताल पर अडिग, राज्य कर्मचारी महासंघ ने दिया समर्थन

कार्रवाई के बाद भी लेखपाल संघ का कार्य बहिष्कार जारी है। जिला मंत्री ध्यान प्रकाश तिवारी ने एलान किया है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं, हड़ताल जारी रहेगी। इस कार्रवाई से लेखपाल डरने वाले नहीं हैं। राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी लेखपालों को समर्थन दिया है। जिलाध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने कहा है कि लेखपालों की मांगें जायज हैं। सोमवार को कलक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन में लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष साहब सिंह, कैलाश चंद्र शर्मा, हुकमचंद्र प्रेमी, राष्ट्र गौरव, विनोद कुमार शर्मा, मंत्री अतरार अहमद, नरेश बाबू समेत अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

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