अलीगढ़ (जेएनएन) । जो उम्र खेलने कूदने की होती है, उस उम्र में दुखों का पहाड़ टूट जाए तब मासूम कंधे पर मासूमियत भी बिलखना लाजिमी है। मां-बाप का साया उठने के साथ ही एक ग्यारह साल की बेटी पर छोटी दो बहन के पालन-पोषण का जिम्मा आ गया।

ये है दर्द भरी हकीकत

ये दर्दभरी हकीकत है संजय गांधी कॉलोनी में एक घर की। यहां के अनिल शर्मा मूलरूप से हाथरस जिले के हसायन के रहने वाले थे। तीन साल पहले उनकी पत्नी ऊषा को बेटा हुआ और उनकी मौत हो गई। अनिल शर्मा नवजात बच्चे को देख रो पड़े, क्योंकि उनके पास बेटी सोनाली, गुंजन व वंशिका भी थीं। अनिल शर्मा ने जैसे-तैसे चारों बच्चों का पालन -पोषण शुरू किया। मगर, एक साल पहले वह भी बीमारी के चलते दुनिया छोड़ गए। माता-पिता का साया उठने से चारों बच्चे अनाथ हो गए। सबसे छोटा बेटा तीन वर्ष का है, जिसे उसकी नानी ले गईं। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते नानी अपनी दोनों नातिनी को संजय गांधी कालोनी ही छोड़ गईं। इन बच्चों से रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया। सबसे बड़ी बेटी सोनाली 11 वर्ष की है। उसकी छोटी बहनें गुंजन (8) व वंशिका (6) साल की है। सोनाली ही अपनी दोनों छोटी बहनों को जैसे-तैसे संभालती है और खाने-पीने की व्यवस्था करती है।

मां की आती है याद

चेतन आश्रम की संचालिका साध्वी पुनीता चेतन पहुंच गईं। पुनीता ने बताया कि रात में ये तीनों बच्चियां अकेले सोती हैं। गुंजन और वंशिका को मां की याद आती है तो उठकर दीदी सोनाली से लिपट कर रोने लगती है।

पड़ोसी करते हैं बच्‍चों की चिंता

पड़ोसी शकुंतला देवी, अनीता शर्मा, सत्यवती देवी इनके खाने-पीने की चिंता कर लेती हैं। पुनीता चेतन ने बताया कि खुली छत होने के चलते रात में बच्चियां डरती हैं। गुरुवार को उनके साथ पहुंचे विजय सिंह, किरण देवी, सीमा देवी ने आटा-दाल, चावल, पैसे आदि से मदद की।

विधायक आवास से 100 कदम की दूर है घर 

ये तीनों बच्चियों का घर छर्रा विधायक ठा.रवेंद्र पाल सिंह के आवास से मात्र 100 कदम की ही दूरी पर है। मगर, बच्चों के लिए कोई सुविधा नहीं पहुंची। हालांकि, कोल विधायक अनिल पाराशर ने बिजली का कनेक्शन जरूर दिलवा दिया है। बिल बच्चों को ही भरना पड़ता है।

Posted By: Mukesh Chaturvedi