केस- 1

हरिओम नगर के रामप्रकाश सिंह को बेटे अनुपम के दाखिले के लिए आधार कार्ड की जरूरत थी। वह नगर निगम गए, लेकिन यहां कोई भी आधार कार्ड संचालक नहीं था, उन्हें वापस आना पड़ा। रामघाट रोड स्थित एक जन सेवा केंद्र से आधार कार्ड बनवाया, जिसके100 रुपये देने पड़े। केस-2

निरंजनपुरी निवासी हेमप्रकाश का बीते दिनों आधार कार्ड खो गया। वह नया आधार कार्ड बनवाने नजदीकी बैंक में गए। लेकिन, वहां कोई भी कार्ड बनाने वाला नहीं था। फिर दोदपुर स्थित जन सेवा केंद्र से आधार कार्ड निकलवाया। यहां उन्हें 100 रुपये देने पड़े। जागरण संवाददाता, अलीगढ़ : एक तरफ जहां केंद्र सरकार 'आधार' के दम पर डिजिटल इंडिया की नींव रख चुकी है। वहीं, जन सेवा केंद्र संचालक अपने खेल से इस उम्मीद को ध्वस्त कर रहे हैं। इन दिनों जिले में आधार कार्ड बनाने के नाम पर जमकर वसूली हो रही है। मुफ्त के आधार कार्ड के लिए सौ और इससे अधिक लिए जा रहे हैं। प्रशासनिक अफसर भी कार्रवाई के नाम पर आंखें मूंदे बैठे हैं।

यह है नियम : अधिकांश योजनाओं के लाभ में आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है। केंद्र सरकार की मंशा है कि जल्द ही शत प्रतिशत लोगों के आधार कार्ड बनाए जा सकें। बीते दिनों सरकार ने केवल सरकारी कार्यालयों में ही आधार कार्ड बनाने का आदेश जारी किया था। मुफ्त में नए आधार बनाने का नियम तय हुआ है। इसमें बदलाव कराने के लिए 25 रुपये की फीस तय है। तय एजेंसी को सरकार की तरफ से 30 से 40 रुपये तक दिए जाते हैं। वसूली का खेल : जिले में 89 आधार कार्ड संचालक हैं। इन सभी ने अपना केंद्र का नाम सरकारी कार्यालयों से जोड़ रखा है। मैप पर भी इन्हीं कार्यालयों की स्थिति तय रखी है। जन सेवा केंद्र संचालक इसमें खेल करते है। वह सुबह नजदीकी कार्यालय में जाकर अपनी मशीन का लॉग इन आइडी डाल देते हैं। इसके बाद मशीन को अपनी दुकान पर ले जाते हैं, वहीं पैसे लेकर आधार कार्ड बनाए जाते हैं। इनका कहना है::

मामला काफी गंभीर है। दो दिन पहले भी शिकायत मिली है। जल्द ही जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। सरकारी कार्यालयों में ही आधार कार्ड बनेंगे।

बच्चू सिंह, एडीएम वित्त

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