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ये कैसी आस्था ! हर रोज प्रदूषित हो रही मां यमुना, पोटली बांध प्रवाहित कर रहे पूजा-सामग्री

Published: Mon, 29 Jun 2026 10:08 AM (GMT+05:30)

आगरा में आस्था के नाम पर यमुना नदी में पूजा सामग्री और मूर्तियां प्रवाहित करने से नदी लगातार प्रदूषित हो ...और पढ़ें

मैली हो रही यमुना।

मैली हो रही यमुना।

HighLights

  1. आगरा में आस्था के नाम पर यमुना हो रही प्रदूषित

  2. पूजा सामग्री, मूर्तियां नदी में फेंकने से बढ़ रहा प्रदूषण

  3. करोड़ों खर्च के बावजूद लोग नदी में कचरा डाल रहे

जागरण संवाददाता, आगरा। मोक्षदायिनी नदी यमुना प्रतिदिन अज्ञानता और आस्था के नाम पर प्रदूषित हो रही है। यमुना नदी का कोई ऐसा घाट नहीं है, यहां लोग पूजा सामग्री के नाम पर कूड़ा कचरे की पोटली बनाकर यमुना नदी और घाटों पर फेंक रहे हैं।

कैलाश मंदिर घाट, यमुना आरती स्थल, हाथी घाट, दशहरा घाट के अतिरिक्त शहर में ऐसे कई छोटे बड़े घाट हैं, जिन पर पूजा सामग्री, खंडित मूर्तियां, देवी-देवताओं की तस्वीरें, नारियल, चुनरी, सिंदूर और अन्य धार्मिक वस्तुएं सीधे यमुना में पाेटली बांधकर सीधे यमुना में फेंक देते हैं।

आस्था के नाम पर पोटली बांध यमुना में प्रवाहित कर रहे पूजा सामग्री

इतना ही नहीं गणेश उत्सव और नव दुर्गा महोत्सव पर पीओपी की बनी इन देवी देवताओं की बड़ी-बड़ी प्रतिमाओं को सीधे यमुना के पानी में प्रवाहित कर देते हैं। यमुना में लोग जो सामग्री फेंकते हैं उनमें कई ऐसे अवशिष्ट पदार्थ और प्लास्टिक की सामग्री होती है जो सालों साल यमुना के तल में पड़ी रहती हैं।

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यमुना नदी और घाटों पर लगे हैं, पूजा सामग्री और पुरानी मूर्तियों के ढेर

जलीय जीवों के लिए बेहद घातक है। नगर निगम ने घाटों पर डस्टबिन की व्यवस्था की है, फिर भी अधिकांश लोग अपनी आदतों से मजबूर हैं। कचरा नदी में ही डालना ठीक समझते हैं। जाने अंजाने में लोग पाप के भागीदार बन रहे हैं। नतीजा यमुना का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।

'घाटों पर हम देखते हैं कि पोटली बांध कर घरों से कूड़ा लाते हैं और सीधे पुल से यमुना में फैंक देते हैं। हमें बुरा लगता है कई बार लोगों को समझाने का प्रयास करते हैं, पर लोग नहीं मानते। - बबलू यादव, पीपली मंडी'


'यमुना को माता कहा जाता है, लेकिन कुछ लोग आस्था के सहारे कर्मकांड़ के चक्कर में यमुना में गंदगी फैला रहे हैं। हमारी नदियां दूषित हो रही हैं। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। - दिनेश यादव, हाथी घाट'

'30 से 40 वर्ष पहले पूजा पाठ और श्रंगार में ऐसी कोई सामग्री नहीं थी जो नदियों को नुकसान पहुंचाए। समय के साथ पूजा पाठ की सामग्री बदल गई है। जो नदियों को नुकसान पहुंचाती हैं। - दिनेश चंद, रामबाग'

'आस्था के नाम पर पाखंड बढ़ गया है। यमुना में लोग टोना - टोटका करने आते हैं। अपने साथ श्रंगार का ऐसा सामान लाते हैं जो नदियों के लिए घातक है। - संजय भाई, काजीपाड़ा' 


विभिन्न योजनाओं के तहत यमुना की सफाई पर करोड़ों रुपये का खर्च 

  1. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत आगर के लिए लगभग 1573 करोड़ रुपये खर्च हुआ।
  2. सीवरेज योजना के तहत गंदे नालों को नदी में गिरने से रोकने के लिए 857 करोड़ से अधिक के काम स्वीकृत हुए हैं।
  3. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, हाइब्रिड वार्षिक मोड एचएएम के अंतर्गत 583 करोड़ रुपये से सीवेज ट्रीटमेंट और उनके रखरखाव के लिए करार हुआ।

धर्म में आधुनिकता नदियों के लिए अभिशाप लेकर आई है। पहले विसर्जन में ऐसी कोई पूजा सामग्री नहीं होती थी, जो नदियों को प्रदूषित करे। वर्तमान में पूजा सामग्री में प्लास्टिक के दोने-पत्तल, पीओपी की मूर्तियां, उनके श्रंगार में उपयोग होने वाला सामान ऐसा होता है जो नदियों और उसमें रहने वाले जलचर के लिए बेहद घातक है। घाटों पर जो कुंड बनाए हैं, वह शोपीस बन कर रह गए। लोग आज भी यमुना में अवशिष्ट सामग्री फेंक रहे हैं। सरकार को इस पर ठोस नीति बनानी होगी।

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पं. अश्विनी कुमार मिश्र, यमुना सत्याग्रही

यमुना आरती स्थल पर नियमित हम संस्थाओं के साथ जुड़कर लोगों को जागरूक करते हैं। समय-समय पर यमुना में स्वच्छता के लिए कैंपेन चलाते हैं। मिल कर सफाई करते हैं। लोगों पर निगरानी रखते हैं कि पूजा सामग्री में ऐसी कोई सामग्री ना हो जो यमुना को प्रदूषित करे। श्रद्धालुओं से भी अपील करते हैं कि आस्था के नाम पर नदियों में कचरा फेंकना बंद करें। नदियां कचरा घर नहीं हैं।

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देवाशीष भट्टाचार्य, पर्यावरणविद्

कैलाश मंदिर कॉरिडाेर के अंतर्गत पर्यटन विभाग के द्वारा घाट पर प्रतिमा और पूजा सामग्री विसर्जन के लिए अलग से पक्का कुंड बनाया जा रहा है। इसमें यमुना का जल भरा जाएगा। श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही हैं कि जो व्यवस्था बनाई जा रही है, उसमें सहयोग करें। नदियों में को दूषित करना पाप के भागीदार बनने जैसा है। नदिया हमारी मां हैं। इन्हें स्वच्छ रखा जाए।

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महंत निर्मल गिरी, कैलाश मंदिर।