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विश्व नेत्रदान दिवस: मौत के बाद भी आंखें देख रही हैं दुनिया... आगरा SN कॉलेज में 413 को मिली रोशनी

By Ajay DubeyEdited By: Abhishek Saxena
Published: Wed, 10 Jun 2026 08:17 AM (IST)Updated: Wed, 10 Jun 2026 09:08 AM (IST)

एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा में नेत्रदान से 413 मरीजों को रोशनी मिली है, जबकि 100 से अधिक अभी भी इंतजार ...और पढ़ें

एसएन की डॉक्टर शैफाली मजूमदार मरीज की आंख चेक करने के दौरान।

एसएन की डॉक्टर शैफाली मजूमदार मरीज की आंख चेक करने के दौरान।

HighLights

  1. एसएन मेडिकल कॉलेज में 413 मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण से मिली रोशनी।

  2. 11 वर्षों में नेत्र बैंक को 805 कॉर्निया प्राप्त हुए।

  3. मृत्यु के 6 घंटे तक नेत्रदान संभव, जागरूकता आवश्यक।

केस वन: फतेहपुर सीकरी के रहने वाले 50 वर्ष के मुकेश शर्मा की बीज और कीटनाशक की दुकान है। वर्ष 2015 में उनकी बाईं आंख में अल्सर हो गया, जिससे आंख पर सफेदी आ गई और दिखाई देना बंद हो गया। एसएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 2017 में कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया। उनकी रोशनी लौट आई, उन्हें दिखाई देने लगा। अब वह दुकान चला रहे हैं।

केस टू: मैनपुरी के रहने वाले साहिब सिंह खेती करते हैं। बचपन से उन्हें सीधी आंख से कम दिखाई देता था और उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देना बंद हो गया। उन्होंने एसएन मेडिकल कॉलेज में दिखाया। वर्ष 2023 में साहिब सिंह का कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया। अब उन्हें दिखाई देने लगा है।

जागरण संवाददाता, आगरा। ये महज दो उदाहरण हैं। आपकी आंखें मृत्यु के बाद भी दुनिया की चकाचौंध देख सकती हैं। नेत्रदान से मिलने वाली कॉर्निया से अंधेरी जिंदगी में रोशनी लौट रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज की नेत्र बैंक में 11 वर्ष में 805 कॉर्निया नेत्रदान से मिली हैं, जिससे 413 अंधता से पीड़ित मरीजों का कार्निया प्रत्यारोपण किया गया।

सौ से अधिक अंधता से पीड़ित मरीजों को कार्निया का इंतजार है। अभी भी नेत्रदान करने वालों की संख्या बहुत कम है। बुधवार को विश्व नेत्रदान दिवस पर लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक किया जाएगा।

मृत्यु के छह घंटे तक हो सकता है नेत्रदान

एसएन मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक संचालित है। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी, हेल्प आगरा और चिकित्सकों की मदद से नेत्रदान कराया जा रहा है। नेत्र बैंक प्रभारी डॉ. शैफाली मजूमदार ने बताया कि मृत्यु के बाद छह घंटे तक नेत्रदान हो सकता है। इसमें कॉर्निया को निकाला जाता है, आंख नहीं निकाली जाती है। नेत्रदान करने के लिए हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं और नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भी भर सकते हैं।

11 वर्षों में एसएन की नेत्र बैंक को मिलीं 805 कार्निया

स्वजन की सहमति पर एसएन के डॉक्टरों की टीम नेत्रदान कराती है। एसएन में नेत्रदान के लिए इसी वर्ष अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर शुरू किया गया है। नेत्रदान करने वालों की संख्या कम है। इसे और बढ़ाने के लिए हॉस्पिटल में मृत्यु होने पर और पोस्टमार्टम को शव पहुंचने पर नेत्रदान के लिए भी कवायद की जा रही है।

एसएन के नेत्र विभाग के अध्यक्ष सहित डॉक्टरों ने किया नेत्रदान

एसएन मेडिकल कालेज एवं चिकित्सालय में हर महीने सात से आठ नेत्रदान हो रहे हैं। एसएन के नेत्र रोग विभाग के पूर्व विधागाध्यक्ष डॉ. एनएन अग्रवाल के निधन पर उनके बेटे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. असीम अग्रवाल ने नेत्रदान कराया था। डॉक्टर और समाजसेवी संगठनों से जुड़े लोगों की मृत्यु होने पर नेत्रदान कराया जा रहा है।

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एसएन में शुरू हो रही कॉर्निया ओपीडी

एसएन मेडिकल कॉलेज में अलग से कॉर्निया ओपीडी भी शुरू की जा रही है। सप्ताह में हर सोमवार और गुरुवार को कॉर्निया ओपीडी संचालित की जाएगी। इसमें कॉर्निया से जुड़ी बीमारियों का इलाज किया जाएगा जिससे कॉर्निया के कारण होने वाली अंधता को कम किया जा सके।

मृत्यु के बाद छह घंटे तक नेत्रदान

  • मृत्यु के बाद आंखों को गीली रूई से ढंक दें।
  • पंखा बंद कर दें, जिससे कॉर्निया में नमी बनी रहे।
  • सिर के नीचे दो तकिया लगा दें।
  • एसएन के नेत्र बैंक के मोबाइल नंबर पर संपर्क कर नेत्रदान करा सकते हैं।

ये है हेल्पलाइन नंबर

नेत्रदान के लिए हेल्पलाइन नंबर 9639592894 पर संपर्क कर सकते हैं।

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