आगरा, जागरण संवाददाता। अब एड्स एचआइवी पाजिटिव रोगी खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। दंपती, पहला बच्चा स्वस्थ्य एचआइवी निगेटिव होने पर दूसरे बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं। ऐसे दंपती भी हैं, जिनके दोनों बच्चे एचआइवी निगेटिव हैं। आज विश्व एड्स दिवस है। एसएन में 2008 से इंटीग्रेटडेड काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग (आइसीटीसी) सेंटर संचालित है।

एचआवी पाजिटिव महिलाओं को दे रही ये सलाह

आइसीटीसी सेंटर प्रभारी, स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. सरोज सिंह ने बताया कि एचआइवी पाजिटिव महिलाओं की एंटी रिट्रो वायरल थैरेपी (Antiretroviral Therapy, ART) एआरटी शुरू कराने के बाद गर्भधारण करने की सलाह दी जाती है। प्रसव के तुरंत बाद नवजात को नेवरापिन सिरप की डोज शुरू कर दी जाती है, इसे तीन से छह महीने तक दिया जाता है। इन बच्चों की एचआइवी की चार जांच कराई जाती हैं, 18 महीने पर बच्चे की अंतिम जांच होती है। इसमें निगेटिव रिपोर्ट आने पर बच्चा निगेटिव माना जाता है। आइटीसीटी सेंटर पर 346 प्रसव हो चुके हैं, इसमें से 210 बच्चे पूरी तरह से निगेटिव हैं। इस वर्ष 36 प्रसव हुए हैं, सभी नवजात की पहली एचआइवी की रिपोर्ट निगेटिव है।

ये मामले आए हैं सामने

केस वन-ताजगंज क्षेत्र के एचआइवी पाजिटिव दंपती ने चार वर्ष पूर्व एसएन के आइसीटीसी सेंटर में काउंसिलिंग के बाद गर्भधारण किया, बेटी को जन्म दिया। 18 महीने बाद बेटी निगेटिव होने पर इस वर्ष दूसरी बार गर्भधारण किया, इस बार बेटे को जन्म दिया है। पहली रिपोर्ट निगेटिव आई है।

केस टू -मुंबई में एक निजी कंपनी में कार्यरत युवक ने शिक्षिका पत्नी से शादी की। शादी के एक वर्ष जांच में पता चला कि दोनों की एचआइवी पाजिटिव है। एसएन में काउंसिलिंग के बाद गर्भधारण किया, अक्टूबर में बेटे को जन्म दिया है।

इस तरह की जाती है जांच

काउंसलर रितु भार्गव ने बताया कि HIV Positive गर्भवती मां की कोख से जन्म लेने वाले नवजात की एचआइवी की जांच 45 दिन , छह महीने, 12 महीने और अंतिम जांच 18 महीने बाद की जाती है। ये सभी जांच निगेटिव आने पर बच्चा एचआइवी निगेटिव माना जाता है।

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11 हजार से अधिक रोगी, समलैंगिक, लिव इन में रहने से बढ़े मरीज

एसएन मेडिकल कालेज में 11610 एड्स रोगी पंजीकृत हैं। समलैंगिक, नशे के लिए इंजेक्शन लगाने और लिव इन में असुरक्षित संबंध बनाने से एचआइवी का संक्रमण बढ़ रहा है।

इस तरह हुए संक्रमित ( एसएन के एचआरटी सेंटर पर पंजीकृत)

  • असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से- 5571
  • वर्कर - 791
  • खून चढ़ाने से -535
  • एचआइवी पाजिटिव मां से बच्चे - 729
  • समलैंगिक -272
  • असुरक्षित इंजेक्शन लगाने से - 368
  • ट्रक चालक -91
  • कारण पता नहीं चला- 3003

एसएन के एआरटी सेंटर प्रभारी डा. जितेंद्र दौनेरिया ने बताया कि अब 4716 एचआइवी पाजिटिव इलाज ले रहे हैं। इसमें से 66 टीबी का इलाज ले रहे हैं। 446 सेकेंड लाइन और 51 थर्ड लाइन इलाज ले रहे हैं।

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काउंसिलिंग में सामने आया है कि समलैंगिक संबंध बनाने वाले 272, लिव इन में असुरक्षित यौन संबंध बनाने से 5571, वर्कर 791 एचआइवी से संक्रमित हुए हैं।  

Edited By: Abhishek Saxena

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