आगरा, जेएनएन। देश के नाम प्राण न्‍यौछावर करने वाले शहीदों को लेकर दावे बड़े-बड़े होते हैं। शहादत के बाद शहीदों के परिवार का दर्द बांटना तो दूर सिस्‍टम उन्‍हें प्रताडि़त करने से भी नहीं चूक रहा। ऐसा ही एक वाकया आगरा का है। यहां जब एक वीर नारी का धैर्य जबाव दे गया तो उसने खुद बीड़ा उठाया और अब सिस्‍टम के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है। वह साल, दर साल अपने शहीद पति की प्रतिमा अनावरण का इंतजार कर रही थी। अधिकारियों के यहां चक्कर भी लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शहीद की पत्नी ने अपने आप जमीन खरीदी, अपने पैसे से मूर्ति लगवाई और गुरुवार को उसका लोकार्पण करा दिया।

किरावली के गांव लौहकरेरा निवासी बदले राम के पुत्र धर्मेंद्र सिंह वर्ष 1998 में सेना में भर्ती हुए थे। वे श्रीनगर में आर्मी की 152 एडी रेजीमेंट की बटालियन में हवलदार के पद पर तैनात रहे। 37 वर्ष की उम्र में 21 नवंबर 2016 को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर के पूंछ सेक्टर में आतंकियों से लोहा लेते हुए धर्मेंद्र शहीद हो गए।

शहीद धर्मेंद्र की दो पुत्रियां कृष्णा (12 वर्ष) व खुशी (10 वर्ष) हैं। वीरनारी ममता देवी ने शासन-प्रशासन के रवैये से आहत होकर आगरा-जयपुर हाईवे पर किरावली के पास राना शीतगृह के पीछे शहीद की प्रतिमा स्थापना कराई। गुरुवार को तीसरी पुण्यतिथि पर सेना के पूर्व कर्नल अपूर्व त्यागी, जिला पंचायत सदस्य चौ. यशपाल सिंह, क्षेत्राधिकारी नम्रता श्रीवास्तव व वीरनारी ममता देवी द्वारा शहीद प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य यशपाल सिंह ने बताया शहीद की प्रतिमा के लिए प्रशासनिक अधिकारियो के पास कई चक्कर काटे, लेकिन सब व्यर्थ गया। वहीं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर भी लोगों में चर्चा रही।

अनावरण समारोह में राजेंद्र सिंह सूबेदार, झंडेलाल सूबेदार, कैप्टन महेश चाहर, सूबेदार प्रताप सिंह चाहर, रामकुमार, ताराचन्द एडवोकेट, हरि सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, कैप्टन हीरा सिंह, कैप्टन सुग्रीव सिंह हवलदार जेएल भट्ट व पिंकी समेत तमाम लोग मौजूद रहे। राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह भी वहां शाम चार बजे पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए।  

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