यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Gandhi Smarak Agra: ...जब आगरा आए थे गांधी जी, यहां किया था यमुना किनारे स्वास्थ्य लाभ
स्वास्थ्य लाभ को 11 दिन रुके थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी। यमुना पार एत्माद्दौला के बराबर में बना हुआ है स्मारक। ...और पढ़ें

आगरा, जागरण संवाददाता। कल-कल करती कालिंदी का मनोरम किनारा और बेबी ताज कहे जाने वाले एत्माद्दौला के बराबर में बनी ब्रजमोहन दास मेहरा की बगीची। वर्ष 1929 में आगरा आए गांधीजी ने इस बगीची को ही अपने 11 दिवसीय प्रवास के लिए चुना था। यमुना किनारे बने चबूतरे पर बापू 'वैष्णव जन तो तेने कहिए...' गुनगुनाते तो उनके साथ बैठे लोग 'पीर पराई जाने रे...' गाने लगते। वर्ष 1948 में गांधीजी की हत्या के बाद इस बगीची को दान कर दिया गया और इसे नया नाम मिला गांधी स्मारक। वर्ष 2015-16 में एडीए ने यहां जीर्णोद्धार कराया था। बारिश में यहां बने भवन के छज्जे टूट गए हैं। क्षेत्रीय लोगों को भी गांधी स्मारक के महत्व के बारे में अधिक जानकारी नहीं है।
गांधी स्मारक में लगे पत्थर पर अंकित विवरण के अनुसार गांधीजी ने स्वास्थ्य लाभ के लिए वर्ष 1929 में 11 से 21 सितंबर तक 11 दिन ब्रजमोहन दास मेहरा की बगीची में प्रवास किया था। उनके साथ कस्तूरबा गांधी, आचार्य कृपलानी, मीरा बहन और जयप्रकाश नारायण की पत्नी प्रभावती यहां रहे थे। उनसे मिलने बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचा करते थे। गांधीजी की हत्या के बाद वर्ष 1948 में ब्रजमोहन दास मेहरा ने अपने पिता रामकृष्ण दास मेहरा की स्मृति में बगीची को महात्मा गांधी स्मारक ट्रस्ट को दान कर दिया था। यहां वर्ष 1955 में महात्मा गांधी की जयंती पर म्यूनिसिपल महिला औषधालय, अायुर्वेदिक औषधालय और मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र खोले गए थे। गांधीजी से जुड़े संस्मरणों का साक्षी रहा गांधी स्मारक बदहाल हो चुका था। वर्ष 2015-16 में एडीए ने यहां जीर्णोद्धार कराया था। यहां चहारदीवारी के साथ चबूतरा सही कराया गया। रंगाई-पुताई कराई गई थी। जिन कमरों में गांधीजी रुके थे, वहां संग्रहालय बना दिया गया। गांधी स्मारक का गेट बंद रहता है और यहां कभी-कभार ही लोग पहुंचते हैं। उन्हें जानकारी देने वाला भी कोई नहीं मिलता।
टूट गए हैं छज्जे
गांधी स्मारक का मुख्य भवन दो मंजिला है। यहां परिसर में मंदिर भी बना हुआ है। बारिश में भवन के छज्जे टूट गए हैं। छज्जे के टूटे पत्थर वहीं पड़े हुए हैं।
इतनी ही जानकारी है कि इस भवन को गांधी स्मारक कहते हैं। हो सकता है कि गांधीजी ने इसका निर्माण किया हो। इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है।
-दिनेश सिंह, क्षेत्रीय निवासी
गांधी स्मारक पर दो अक्टूबर को लोग आते हैं, लेकिन अन्य दिनों में कोई नहीं आता। स्मारक के छज्जे टूट गए हैं, लेकिन कोई इसकी सुध नहीं ले रहा है।
-दिलीप कुमार, क्षेत्रीय निवासी
