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Utangan River: कागजों में साफ हो गई आगरा की उटंगन नदी, हकीकत है इससे अलग

यह राजस्थान व उत्तर प्रदेश राज्यों में बहने वाली एक नदी है। राजस्थान में करौली ज़िले में अरावली पहाड़ियों में शुरू ये आगरा जिले में पहुंचती है।अंत में जाकर यमुना में समाप्त होती है। यह 288 किमी लंबी नदी है। पिछले लगभग दो दशक से इसमें पानी नहीं आया।

By Prateek GuptaEdited By: Published: Mon, 26 Jul 2021 09:54 AM (IST)Updated: Mon, 26 Jul 2021 09:54 AM (IST)
Utangan River: कागजों में साफ हो गई आगरा की उटंगन नदी, हकीकत है इससे अलग
करौली से आगरा आ रही उटंगन नदी का ये हाल है।

आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा के खेरागढ़, पिनाहट, फतेहाबाद ब्लाक क्षेत्र से गुजरने वाली उटंगन नदी भी बदहाल होती जा रही है। इसमें नालों का गंदा पानी एकत्रित हो रहा है। इसकी वजह से इसमें सिल्ट बढ़ती जा रही है। जबकि पिछले दिनों इस नदी को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत साफ किए जाने का दावा किया गया था। इस पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। इसके बावजूद नदी की दशा में कोई सुधार नहीं है।

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यह राजस्थान व उत्तर प्रदेश राज्यों में बहने वाली एक नदी है। राजस्थान में करौली ज़िले में अरावली पहाड़ियों में शुरू ये आगरा जिले में पहुंचती है।अंत में जाकर यमुना में समाप्त होती है। यह 288 किमी लंबी नदी है। पिछले लगभग दो दशक से इसमें पानी नहीं आया। इसके चलते ये मानसून की नदी बनकर ही रह गई है। बारिश के दौरान जो पानी एकत्रित होता है, वही इसमें रहता है। अधिकांश जगहों पर ये झाड़ियों से घिर गई है।इसको देखते हुए इसे मनरेगा के तहत साफ करने का बीड़ा उठाया गया। दावा किया गया कि इसका अधिकांश क्षेत्र साफ कर दिया गया है लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। यह अभी भी तमाम जगहों पर झाड़ियों से पटी है। कई गांवों के गंदे पानी के नाले इसमें आकर मिल रहे हैं। इनकी रोकथाम के लिए अब तक कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। इसके चलते यह पूरी तरह से बदहाल हो गई। इसके किनारों पर बदबू से बुरा हाल रहता है। आसपास के लोगों का कहना है कि नदी की सफाई ही नहीं कराई गई है।

कर सकती है पेयजलापूर्ति

राजस्‍थान से उत्‍तर प्रदेश आ रही उटंगन नदी की यदि पर्याप्‍त सफाई और डीसिल्टिंग हो जाए तो ये नदी कई गांवों के लोगों की प्‍यास भी बुझा सकती है। राष्‍ट्रीय हरित प्राधिकरण देश की नदियों की दुर्दशा को लेकर कई बार आपत्ति जता चुका है। राजस्‍थान के कई इलाकों में मानसून के दौरान भरपूर बारिश होती है, यदि बारिश का पानी ही इस नदी में आने लगेगा तो सालभर ये नदी पानी से लबालब नजर आएगी। साथ ही ग्रामीणों के खेतों की सिंचाई के लिए भी पानी की कमी नहीं होगी।


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