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चिकित्सकों के पर्चे पर अब हिंदी में लिखी जाएंगी दवाएं और खुराक, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

Published: Mon, 28 Sep 2026 06:23 PM (IST)

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से पर्चे पर दवा का नाम और खुराक हिंदी में लिखने का आग्रह किया ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. उप मुख्यमंत्री ने हिंदी में पर्चे लिखने का आग्रह किया।

  2. दवा का नाम और खुराक हिंदी में स्पष्ट लिखें।

  3. मरीजों से स्थानीय भाषा में संवाद पर सहमति बनी।

जागरण संवाददाता, आगरा। चिकित्सक के पर्चे पर लिखी दवाएं कई बार उनके साथी भी नहीं समझ पाते हैं। अस्पताल और क्लीनिक की जगह किसी अन्य मेडिकल स्टोर पर दवा लेने के लिए पर्चा दिखाने पर उसे समझना मुश्किल होता है। दवा की खुराक कितनी बार लेनी है, इसे लेकर मरीज परेशान रहते हैं।

मरीजों की हर रोज की समस्या को चिकित्सक खत्म कर सकते हैं। इसके लिए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों को पत्र लिखकर पर्चे में हिंदी में नाम और मरीज से मातृभाषा व स्थानीय भाषा में संवाद करने का आग्रह किया है। यह सरकारी और निजी चिकित्सकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। चिकित्सकों का कहना है कि पर्चे पर दवा का नाम भले ही अंग्रेजी व हिंदी में लिखें, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए। दवा की खुराक को हिंदी में ही लिखें।

सरकारी और निजी अस्पतालों में चिकित्सक की पर्चे पर लिखी दवाएं और जांच को अधिकांश मरीज समझ नहीं पाते हैं। दवा की खुराक कितने बार लेनी है, इसमें भी समस्या आती है। मेडिकल स्टोर से मरीजों को यह कहकर कि चिकित्सक द्वारा लिखी दवा उनके ही हास्पिटल और क्लीनिक में ही मिलेगी, दूसरी दवा दे दी जाती है। सरकारी और निजी चिकित्सक भी सहमत हैं कि दवा स्पष्ट लिखी जाए। अंग्रेजी में पढ़ाई और दवा लिखने की आदत से हिंदी में लिखने में समस्या आ सकती है। मगर, साफ्टवेयर से पर्चे लिखने का चलन बढ़ने से मदद मिलेगी।

प्रतिदिन लिखे जाते हैं 25 हजार से अधिक पर्चे

जिले में 1700 निजी चिकित्सक हैं। एसएन मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल, लेडी लायल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सात हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं। चिकित्सक प्रतिदिन करीब 25 हजार पर्चे लिखते हैं। इसमें बीमारी, लक्षण, दवा और जांच के बारे में भी लिखा जाता है। चिकित्सकों के बदलाव से बड़ा अंतर आ सकता है।

पर्चे पर हिंदी में दवा का नाम लिखने में कुछ समस्या आ सकती है, क्योंकि पढ़ाई अंग्रेजी में करने के साथ ही दवा के नाम भी अंग्रेजी में ही लिखने की आदत है। जो भी दवा लिखी जाए, वह स्पष्ट होनी चाहिए। मातृभाषा में बात करने से मरीज की समस्या को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। डॉक्टर ने पर्चे पर मरीजों के लिए सलाह हिंदी में प्रिंट कराना शुरू कर दी है।

-डाॅ. पंकज नगाइच, अध्यक्ष आइएमए आगरा

पर्चे पर दवाओं का नाम हिंदी में लिखें या अंग्रेजी में यह स्पष्ट होना चाहिए, जिससे मरीज दवा किसी भी जगह से ले सके। साथ ही दवा की खुराक कितने बार लेनी है, यह हिंदी में ही लिखी होनी चाहिए। डॉक्टर पर्चे पर संकेत और ओडी, बीडी और टीडीएस लिख देते हैं, इसे मरीज समझ नहीं पाते हैं।

-डाॅ. एके गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष मेडिसिन विभाग एसएन मेडिकल कालेज

सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों से डॉक्टर स्थानीय भाषा में ही बात करते हैं। इससे मरीज की समस्या को समझने और बीमारी को डायग्नोज करने में मदद मिलती है। पर्चे पर ब्रांड की जगह साल्ट का नाम लिखा जाता है, यह भी स्पष्ट होता है। दवा भी अस्पताल से ही मिलती हैं।

-डाॅ. नंदन सिंह अध्यक्ष प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ आगरा