आगरा, जागरण संवाददाता। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल को अदालत से राहत नहीं मिल सकी। एत्मादपुर में वर्ष 2016 में बिना अनुमति सभा करने पर उनके खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।

एसपी सिंह बघेल व अन्य के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। केंद्रीय मंत्री ने आरोप से डिस्चार्ज करने को विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। बुधवार को प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद विशेष मजिस्ट्रेट एमपी/एमएलए अर्जुन ने उसे खारिज करते हुए आरोप तय करने के लिए पत्रावली पर 28 मई की तारीख नियत की है।

पंचायत बुलाने का किया था एलान

मामले के अनुसार एत्मादपुर थाने में दर्ज मुकदमे में आरोपितों मुस्लिम खां व अन्य की गिरफ्तारी न होने पर एसपी सिंह बघेल ने पांच अप्रैल 2016 को कस्बे में पंचायत बुलाने का एलान किया था। जिसके बाद 11 अप्रैल को समर्थकों के साथ बिना अनुमति हासिल किए स्टेशन रोड स्थित नगला गंगाराम तिराहे पर तख्त बैनर लाउड स्पीकर लगा सभा एवं भाषण दिया। सभा में उनके सैकड़ाें समर्थक मौजूद थे। तत्कालीन थानाध्यक्ष की आेर से उक्त मामले में धारा 144 का उल्लंघन करने पर प्रो. एसपी सिंह बघेल सहित अन्य के विरुद्ध धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

चार्जशीट अदालत में दी थी

पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की थी। अदालत ने मामले में नवंबर 2016 में आरोपितों को मुकदमे के विचारण के लिए तलब करने के आदेश किये थे।उक्त मुकदमा पूर्व में विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश नीरज गाैतम की अदालत में चल रहा था।वहीं पर केंद्रीय मंत्री के वरिष्ठ अधिवक्ता केके शर्मा द्वारा डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।मजिस्ट्रेट ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए विशेष मजिस्ट्रेट एमपीएमएमएल अर्जुन को अधिकृत करने के कारण उक्त पत्रावली उनकी अदालत में स्थानांतरित हो गई थी।

केंद्रीय मंत्री के अधिवक्ता ने दी ये दलील

केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल के अधिवक्ता ने डिस्चार्ज के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कहा कि वह समाज सेवक एवं जनप्रतिनिधि हैं।वह इस कारण समाज के प्रत्येक वर्ग की समस्याओं के समाधान को जनता के हितों के लिए उनके साथ तत्पर रहते हैं। इसलिए विरोधी दल के लोगों ने राजनीतिक प्रतिद्वंदिता एवं द्वेष के चलते सत्ता पक्ष के दबाव में झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था।पुलिस द्वारा घटना का कोई वीडियो या फोटोग्राफ पत्रावली पर साक्ष्य के रूप में पेश नहीं किया गया है।

विवेचक द्वारा एसडीएम एत्मादपुर के बयान का हवाला देकर विभिन्न त्याेहार एवं पर्व को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए क्षेत्र में धारा 144 लागू होने का कथन किया गया है।घटना 11 अप्रैल की है, जबकि एसडीएम एत्मादपुर का आदेश 30 अप्रैल का है। जिसके आधार पर धारा 144 लागू ही नहीं थी। तब धारा 144 का अपराध कैसे घटित हो गया। इस स्थिति में आरोपित को धारा 239 के तहत डिस्चार्ज करने का पर्याप्त आधार है।

बचाव और अभियाेजन के तर्क सुनने के बाद अदालत ने ये दिया निर्णय

बचाव पक्ष के अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र का अभियोजन की ओर से विरोध किया गया। विशेष मजिस्ट्रेट एमपी/एमएलए अर्जुन ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि उल्लेखनीय है कि उपरोक्त विवेचना के प्रकाश में इस स्तर पर यह स्पष्ट नहीं अभिमत अंतिम रूप से विरचित किया जाना संभव एवं विधि सम्मत नहीं है।

प्रार्थीगण ने कोई अपराध किया है या नहीं, ये विचारण की वस्तु है। मगर, इस स्तर पर पत्रावली पर उपलब्ध सामग्री के अवलोकन से यह परिलक्षित होता है कि प्रश्नगत अपराध में आरोपितों की संलिप्तता प्रथम दृष्टया दृढ़ रूप से प्रकट होती है। अत: आरोपितों द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में लिए गए आधारों का निराकरण से पूर्व इस स्तर पर किया जाना संभव नहीं है।

उनका निराकरण विचारण कार्यवाही के दौरान अभियोजन व आरोपित दोनों पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्य की समीक्षा के उपरांत ही किया जा सकता है। इस स्तर पर आरोपित को डिस्चार्ज किए जाने का आधार पर्याप्त होना परिलक्षित नहीं होने पर प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाता है।

Edited By: Prateek Gupta