आगरा, जेएनएन। डेंगू एक के बाद एक घर की खुशियों को छन रहा है और इधर प्रशासन आंखें मूंदे हुए है। पखवाड़ेभर में आगरा मंडल में दर्जनभर से अधिक मौतें हो चुकी हैं लेकिन अभी तक प्रशासनिक अमले को फागिंग की सुध नहीं आई है। इसी का नतीजा है कि आगरा और मैनपुरी में दो मौतें हो गईं।

सरला बाग, दयालबाग निवासी कनव श्रीवास्‍तव पुुुत्र मनीष्‍ा चंद्र की दिल्‍ली में इलाज के दौरान मौत हो गई। कनव सेंट कॉनरेड इंटर कॉलेज में पांचवी का छात्र था। पढ़ाई में मेधावी रहने वाले कनव को पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा था। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले उसे आगरा के ही हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था लेकिन जब शनिवार को डॉक्‍टर्स ने जवाब दे दिया तो परिजन उसे दिल्‍ली के अपोलो हॉस्पिटल लेकर गए। यहां शनिवार की रात उसने आखिरी सांस ली। उधर मैनपुरी के संसारपुर में एक महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि बड़ी संख्या में मरीज गैर जिलों में भर्ती हैं। पखवाड़े भर में यहां डेंगू से मरने वालों की संख्या दर्जन भर पहुंच चुकी है। लगातार हो रही मौतों ने अब स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डेंगू बुखार का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। संसारपुर निवासी सीमा (32) पत्नी लालू कई दिनों से बुखार से बीमार थीं। डेंगू की पुष्टि होने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती करने की सलाह दी। हालत गंभीर होती देख रेफर कर दिया। यहां भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और शनिवार की रात उनकी मौत हो गई। सप्ताह भर में संसारपुर में डेंगू से यह दूसरी मौत है। बड़ी संख्या में डेंगू पीडि़त मरीजों का सैफई, आगरा और दिल्ली के निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल में भी लगभग दर्जन भर डेंगू पीडि़त मरीजों को भर्ती कराया गया है। डेंगू का कहर तेज हो रहा है जबकि स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका प्रशासन के स्तर से जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं कराया जा रहा है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

कैसे और कब होता है डेंगू

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ अतुल कुलश्रेष्‍ठ के अनुसार डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता।

कैसे फैलता है

डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है तो वह उस मरीज का खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है। जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है।

कब दिखता है असर

काटे जाने के करीब 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।

कितने तरह का होता है डेंगू

यह तीन तरह का होता है

1. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार

2. डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF)

3. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)

इन तीनों में से दूसरे और तीसरे तरह का डेंगू सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। साधारण डेंगू बुखार अपने आप ठीक हो जाता है और इससे जान जाने का खतरा नहीं होता लेकिन अगर किसी को DHF या DSS है और उसका फौरन इलाज शुरू नहीं किया जाता तो जान जा सकती है। इसलिए यह पहचानना सबसे जरूरी है कि बुखार साधारण डेंगू है, DHF है या DSS है।

लक्षण

साधारण डेंगू बुखार

- ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना। 

- सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना। 

- आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है 

- बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना। 

- गले में हल्का-सा दर्द होना। 

- शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना।

क्लासिकल साधारण डेंगू बुखार

- करीब 5 से 7 दिन तक रहता है और मरीज ठीक हो जाता है।

- ज्यादातर मामलों में इसी किस्म का डेंगू बुखार होता है।

डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF)

- नाक और मसूढ़ों से खून आना। 

- शौच या उलटी में खून आना। 

- स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाना।

डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) 

- मरीज बहुत बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी स्किन ठंडी महसूस होती है। 

- मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है।

- मरीज की नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। उसका ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाता है।

ध्‍यान रहे

डेंगू से कई बार मल्टी ऑर्गन फेल्योर भी हो जाता है। इसमें सेल्स के अंदर मौजूद फ्लूइड बाहर निकल जाता है। पेट के अंदर पानी जमा हो जाता है। लंग्स और लिवर पर बुरा असर पड़ता है और ये काम करना बंद कर देते हैं।

बच्चों में खतरा ज्यादा

बच्चों का इम्युन सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है और वे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए उनके प्रति सचेत होने की ज्यादा जरूरत है। पैरंट्स ध्यान दें कि बच्चे घर से बाहर पूरे कपड़े पहनकर जाएं। जहां खेलते हों, वहां आसपास गंदा पानी न जमा हो। स्कूल प्रशासन इस बात का ध्यान रखे कि स्कूलों में मच्छर न पनप पाएं। बहुत छोटे बच्चे खुलकर बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाते इसलिए अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं। बच्चों को डेंगू हो तो उन्हें अस्पताल में रखकर ही इलाज कराना चाहिए क्योंकि बच्चों में प्लेटलेट्स जल्दी गिरते हैं और उनमें डीहाइड्रेशन (पानी की कमी) भी जल्दी होता है।

 

Posted By: Tanu Gupta

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