आगरा, विनीत मिश्र। ये वैष्णवी है, उम्र है महज ढाई साल। छोटी सी उम्र में ही इस बिटिया ने सबको अपनी प्रतिभा का कायल बना दिया। संस्कृत में गायत्री मंत्र हों या फिर अन्य श्लोक बच्ची को कंठस्थ हैं, देश-विदेश की किसी भी बड़ी पर्सनैलिटी की फोटो देखकर ही पलभर में नाम बता देती है। अपनी तोतली भाषा में वैष्णवी पशु-पक्षियों की आवाज भी निकालती है। प्रतिभा के बूते इस उम्र में ही वैष्णवी का नाम इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया।

कर्नाटक के धारवाड़ के निवासी उमेश मुतागी सेना में हवलदार हैं और वर्तमान में मथुरा में तैनात हैं। ढाई साल की बेटी वैष्णवी की उम्र जब महज दो साल थी, तो उसमें छिपी प्रतिभा देख उमेश और पत्नी सक्कूबाई ने उसे पढ़ाना शुरू किया। दंपती की मेहनत रंग लाई और बिटिया की प्रतिभा निखर गई। राष्ट्रगान हो या फिर संस्कृत के श्लोक, वैष्णवी को सब रटा है, एक-एक शब्द स्पष्ट। यहां तक किसी भी बड़े राजनेता या अन्य बड़ी हस्ती की तस्वीर देखकर ही वैष्णवी बिना विचारे उसका नाम बता देती है। ये उसकी प्रतिभा ही है कि पशु -पक्षी से लेकर सब्जी और फल की तस्वीर देखकर ही उसके नाम बताने से लेकर पशु-पक्षियों की आवाज की नकल भी अपनी तोतली भाषा में करती है। सौर प्रणाली गृह हों या फिर गणितीय संकेत, शरीर के अंग हों या फिर विद्युत यंत्र के नाम। सब स्पष्ट रूप से पता हैं।

बिटिया को ऐसे सिखाया

उमेश और सक्कूबाई कहती हैं कि जब वैष्णवी दो साल की थी, तब उसमें पढ़ाई के प्रति लगन देखी। वह अक्सर रात में किताब उठाती और खुद को पढ़ाने की जिद करती है। ऐसे में प्रतिभा को परख दंपती ने उसे सिखाने की ठान ली। लैपटॉप पर देश-विदेश के बड़े-बड़े नेताओं की तस्वीर दिखाई और बताया। नतीजा ये हुआ कि वैष्णवी 170 से अधिक हस्ती की तस्वीर देखकर नाम बता देती है। 1 से 70 तक संख्या की पहचान, महनों, हफ्तों और संकेत का ज्ञान तो ऐसा कि बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाएं। खास बात ये है कि वैष्णवी ने अभी तक स्कूल का मुंह नहीं देखा।

ऐसे दर्ज कराया नाम

एक सितंबर 2017 को जन्मी वैष्णवी के पिता ने बेटी का नाम दर्ज कराने के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में ऑनलाइन आवेदन किया। फिर उसका वीडियो बनाकर भेजा। वैष्णवी ने राष्ट्रगान, पांच संस्कृत मंत्र, 170 इतिहास और वर्तमान की पसनैलिटी के फोटो देखकर उनके नाम बताए। सोलर सिस्टम प्लांट, बॉडी पार्ट्स, जानवर, चिड़िया, बेसिक मैथ सिंबल, कलर, 15 जनरल नॉलेज के आंसर, 1 से 70 तक संख्या की पहचान, पशु-पक्षियों की आवाज निकाली। इस पर 21 मार्च 2020 को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने उसका नाम दर्ज कर प्रशस्ति पत्र दिया। 

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