आगरा, जागरण संवाददाता। रेलवे धीरे-धीरे यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ा रहा है। करीब 70 फीसद ट्रेनें पटरियों को दौड़ने लगी हैं। अब इसके साथ ही यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के भी वापस लौटाने की मांग उठने लगी है।

पिछले साल 22 मार्च से रेलवे ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए यात्री ट्रेनों का संचालन रोक दिया था। अब धीरे-धीरे कर 70 फीसद ट्रेनें संचालित हो गई हैं। लाकडाउन से पहले ट्रेनों में वरिष्ठ नागरिकों को किराए में छूट मिलती थी, जो बंद कर दी गई। अब दोबारा ट्रेनें तो शुरू हो गई हैं, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों को किराए में मिलने वाली छूट बहाल नहीं हुई है।इसके साथ एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को कंबल, चादर व बेडशीट की सुविधा भी संक्रमण का हवाला देकर बंद की गई थी। इस सुविधा के विकल्प ने रेलवे ने एक बार प्रयोग होने वाले बेडशीट, कंबल, चादर उपलब्ध कराए हैं, लेकिन इसके लिए यात्रियों को भुगतान करना होता है। यात्रियों की मांग है कि रेलवे को आरक्षित टिकट पर एक बार उपयोग किए जाने वाले चादर, कंबल, बेडशीट आदि निश्शुल्क उपलब्ध कराने चाहिए। मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य राजकुमार शर्मा का कहना है कि रेलवे को यात्री सुविधाएं शुरू करनी चाहिएं। दैनिक यात्रियों के लिए ट्रेनेंं शुरू की जाएं। इसको लेकर रेलमंत्री को भी ज्ञापन देंगे।

घंटों करना पड़ता है बाहर इंतजार

रेलवे ने संक्रमण का हवाला देकर यात्रियों को 90 मिनट पहले स्टेशन पर बुलाया जा रहा है। स्टेशन के बाहर ठंड में यात्रियों को इंतजार करना होता है, जबकि पहले यात्रियों को ट्रेन के समय तक सीधे स्टेशन में प्रवेश मिलता था। कैंट रेलवे स्टेशन के बाहर टिन शेड में यात्रियों की भीड़ लगी रहती है।

छोटे स्टेशनों पर खत्म हुए स्टापेज

कोरोना संक्रमण से पहले तक जो एक्सप्रेस व मेल ट्रेनें छोटे स्टेशनों पर रुकती थीं, उनमें से कई ट्रेनों के छाेटे स्टेशनों के स्टापेज खत्म कर दिए गए हैं। फरह, बाद, कोसी, होडल जैसे स्टेशनों पर ट्रेनें रुकती थीं, लेकिन अब स्पेशल ट्रेनों को इन स्टेशनों पर ठहराव नहीं दिया गया है। इससे इन स्टेशनों पर उतरने वाले यात्रियों को प्रमुख स्टेशनों से ही ट्रेन पकड़नी पड़ रही है। इसके अलावा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन न होने से भी यात्री परेशान हैं। 

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