आगरा, जागरण संवाददाता । नशे के लिए इस्तेमाल हो रहीं नारकोटिक्स की दवाओं के अवैध कारोबार पर शिकंजा कसने लगा है। नारकोटिक्स दवा के निर्माता, सीएंडएफ और डिस्ट्रीब्यूटर को हर माह सप्लाई की गईं दवाओं का रिकार्ड सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ को देना होगा। इन दवाओं की बिक्री का सत्यापन स्थानीय औषधि निरीक्षक द्वारा किया जाएगा।

आगरा गैंग के बाद जयपुरिया गैंग से बड़ी संख्या में नशीली दवाएं जब्त की गई थीं। ये जेनेरिक दवाएं थीं, इन्हें थोक दवा कारोबारियों द्वारा सीएंडएफ और डिस्ट्रीब्यूटर से खरीदने के बाद बोगस फर्मों पर बिक्री दिखाई जा रही थी। इसके बाद 11 राज्यों में नशे के लिए नारकोटिक्स की दवाओं को सप्लाई किया जा रहा था। औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि नारकोटिक्स की दवा की बिक्री करते समय मेडिकल स्टोर संचालक को डाक्टर का पर्चा रखने के साथ ही रिकार्ड औषधि विभाग को दिया जाना चाहिए। मगर, ऐसा नहीं हो रहा है। ऐसे में मुख्यालय स्तर से नारकोटिक्स की दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम के लिए निर्माता कंपनी, सीएंडएफ और डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा दवा कहां सप्लाई की गई, इसका रिकार्ड देना होगा। इस रिकार्ड से थोक दवा कारोबारी और मेडिकल स्टोर पर नारकोटिक्स की दवाओं की बिक्री का सत्यापन किया जा सकेगा। इसमें गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। मकान मालिक को रेंट एग्रीमेंट के साथ लेना होगा लाइसेंस

जयपुरिया गैंग द्वारा किराए पर कमरा लेकर नशीली दवाओं के अवैध गोदाम संचालित किए जा रहे थे। इसे लेकर भी सख्ती की गई है, दवा कारोबारी को किराए पर कमरा देते समय मकान मालिक को रेंट एग्रीमेंट के साथ लाइसेंस भी रखना होगा। ऐसा न करने पर मकान मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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