आगरा, जागरण संवाददाता। पितृपक्ष का आज अंतिम दिन है। सर्व पितृ अमावस्‍या पर जहां भूले बिसरों के लिए तर्पण कर पितरों की कृपा प्राप्‍त हो सकती है वहीं कुंडली में लगे पितृ दोष से भी मुक्ति पाई जा सकती है। ज्‍योतिषाचार्य डॉ शोनू मेहरोत्रा के अनुूसार ज्‍योतिष में पितृदोष का बहुत महत्व माना जाता है। प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में पितृदोष सबसे बड़ा दोष माना गया है। इससे पीड़ित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टमय हो जाता है।

ज्‍योतिषाचार्य डॉ शोनू मेहरोत्रा

इन उपायों से पाएं

डॉ शोनू बताती हैं कि जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है। पितृदोष से पीड़ित जातक की उन्नति में बाधा रहती है। पितृदोष का प्रभाव कम करने के लिए सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या के कई सरल उपाय हैं।

- घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने स्वर्गीय परिजनों का फोटो लगाकर उस पर हार चढ़ाकर उनकी पूजा स्तुति करना चाहिए। उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

- जरूरतमंदों अथवा गुणी ब्राह्मणों को भोजन कराएं। भोजन में मृतात्मा की कम से कम एक पसंद की वस्तु अवश्य बनाएं।

- नंगे पैर शिव मंदिर में जाकर आंक के 21 पुष्प, कच्ची लस्सी, बिल्वपत्र के साथ शिवजी की पूजा करें। इससे पितृदोष का प्रभाव कम होता है।

- गरीब कन्या का विवाह या बीमारी में सहायता करने पर लाभ मिलता है।

- ब्राह्मणों को प्रतीकात्मक गौदान, पानी पिलाने के लिए कुएं खुदवाएं या राहगीरों को शीतल जल पिलाने से भी पितृदोष से छुटकारा मिलता है।

- पवित्र पीपल तथा बरगद के पेड़ लगाएं।

- विष्णु भगवान के मंत्र जाप, श्रीमद्‍भागवत गीता का पाठ करने से भी पित्तरों को शांति मिलती है और दोष में कमी आती है।

- पितरों के नाम पर गरीब विद्यार्थियों की मदद करने तथा दिवंगत परिजनों के नाम से अस्पताल, मंदिर, विद्यालय, धर्मशाला आदि का निर्माण करवाने से भी अत्यंत लाभ मिलता है।

- इस दिन अगर हो सके तो अपनी सामर्थ्यानुसार गरीबों को वस्त्र और अन्न आदि दान करने से भी यह दोष मिटता है।

- पीपल के वृक्ष पर दोपहर में जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल, काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।

- शाम के समय दीप जलाएं और नाग स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र व नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। इससे भी पितृ दोष की शांति होती है।

 

Posted By: Tanu Gupta

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