आगरा, जागरण संवाददाता। शीतगृह में भंडारित पांच करोड़ पैकेट (50 किलोग्राम प्रति पैकेट) में से 35 फीसद की अभी निकासी नहीं हुई है। 31 अक्टूबर शीतगृह संचालन की अंतिम तिथि है, जिससे पहले किसानों को भंडारित आलू को निकालना होगा। किसान दाम बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे निकासी की गति धीमी है। वहीं गत सप्ताह दो दिन लगातार बारिश होने के कारण अभी आलू बोवाई भी पिछड़ गई है, जिससे बीज निकासी भी नहीं हो रही है। इधर पंजाब के नए आलू के बाजार में आने तक, पुराने आलू का भाव बाजार में बढ़ने के आसार हैं।

जिले में 71 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल हुई थी। फरवरी में खोदाई के बाद अधिकतर किसान फसल को भंडारित कर देते हैं, तो कुछ खेत से ही आलू बेच देते हैं। इस बार सड़क ही नहीं ट्रैक के माध्यम से भी आलू को दूसरे राज्यों तक पहुंचाया गया, लेकिन फिर भी आलू शीतगृह में फंसा हुआ है। दिल्ली सहित दक्षिण भारत की मंडियों में आगरा के आलू की मांग सर्वाधिक होती है। फिलहाल 250 से 350 ट्रक आलू रोज बाहर की मंडियों में जा रहा है। 15 फीसद आलू की खपत बीज में तो 10 फीसद छोटा आलू माना जा रहा है, लेकिन बचे हुए आलू की निकासी समय से नहीं हुई तो किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है। कुछ व्यापारियों ने भी दाम बढ़ने की उम्मीद से किसानों से फसल पर आलू खरीद भंडारित कर रखा है।

फुटकर में 25 रुपये तो थोक में 10 रुपये प्रति किलोग्राम है भाव

आलू का थोक भाव 500 रुपये पैकेट(50 किलोग्राम प्रति पैकेट) चल रहा है। वहीं छोटे आलू 300 से 400 रुपये प्रति पैकेट तक है। फुटकर में आलू 20 से 25 रुपये प्रतिकिलोग्राम बिक रहा है।

दाम बढ़ने की उम्मीद से आलू भंडारित कर रखा था, लेकिन दाम स्थिर बने हुए हैं। शीतगृह बंद होने वाले है, जिस कारण जल्द निकासी करनी होगी।

हरिओम, किसान

नवंबर में आएगी पंजाब की फसल

10 नवंबर तक पंजाब में आलू की फसल तैयार हो जाती है। नवंबर के अंतिम सप्ताह तक कन्नौज और आस-पास के क्षेत्र का आलू बाजार में आ जाएगा। इसके बाद स्थानीय आलू की मांग घट जाएगी।

Edited By: Prateek Gupta