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आगरा में ऑपरेशन कायाकल्प की हकीकत: 'अर्श' वाले विचार हवाहवाई, बदहाल स्कूलों में फर्श पर पढ़ रहे नौनिहाल

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:02 AM (IST)

ऑपरेशन कायाकल्प के तहत आगरा के कई परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बदहाल है, जहां स्मार्ट क्लास, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसे 19 मानक पूरे नहीं हैं।

अछनेरा ब्लाक के भरतपुर रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय-2 में जमीन पर बैठ पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे। जागरण

अछनेरा ब्लाक के भरतपुर रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय-2 में जमीन पर बैठ पढ़ाई करने को मजबूर बच्चे। जागरण

HighLights

  1. आगरा के 1120 स्कूलों में 19 मानक अधूरे।

  2. 342 स्कूलों में फर्नीचर की भारी कमी।

  3. जर्जर भवनों के कारण बच्चे जमीन पर पढ़ने को मजबूर।

ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जिले के परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने के लिए किए जा रहे प्रयास गिनती के स्कूलों तक सिमट कर रह गए।कुछ स्कूलों में कराए गए रंग-रोगन कार्य से लगातार पीठ थपथपाई जा रही है। 2219 विद्यालयों में से 1120 में स्मार्ट क्लास, शुद्ध पेयजल, शौचालय और टाइल्स समेत सभी 19 मानक पूरे नहीं हैं। 234 जर्जर विद्यालयों को चिन्हित कर ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई भवन अब भी खड़े हैं। बच्चों को हादसों से बचाने के लिए कक्षा टिनशेड या दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित की गईं।

सही भवन वाले 342 विद्यालयों में फर्नीचर की कमी है। जिस कारण छात्र-छात्राओं को जमीन पर बैठ पढ़ाने करने को मजबूर होना पड़ रहा है। दैनिक जागरण टीम ने मंगलवार को फतेहाबाद, अकोला, फतेहपुर सीकरी, अछनेरा के स्कूलों की पड़ताल की तो सिस्टम की हकीकत सामने आई। स्कूलों में छात्र फर्श पर बिछी दरी पर बैठ पढ़ते नजर आए। तीन दिन के अभियान में पहले दिन जागरण संवाददाता सुमित द्विवेदी की रिपोर्ट:

जागरण संवाददाता, आगरा। फतेहाबाद प्रथम प्राथमिक विद्यालय में कुल 202 बच्चे पढ़ते हैं। कक्षा एक से चार तक फर्नीचर है, लेकिन कक्षा पांच के 50 बच्चे फर्नीचर न होने से जमीन पर टाटपट्टी बिछाकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक फिरदौज बेग ने बताया कक्षा तीन और चार के कमरों में बरसात के समय छत से पानी टपकता है। मरम्मत के बावजूद रिसाव बंद नहीं हुआ। फर्नीचर के लिए कई बार डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक नहीं मिला। खंड शिक्षा अधिकारी जगत सिंह ने कहा ब्लाक के 30 स्कूलों में कायाकल्प का काम अभी होना है।

भवन जर्जर होने के कारण सितंबर में ध्वस्त कर दिया गया

अकोला ब्लाक के गांव नगला झब्बा में प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर होने के कारण सितंबर में ध्वस्त कर दिया गया। नया स्कूल का निर्माण भी तब तक नहीं शुरू हो सका है। इस कारण गांव के ही उदय सिंह के मकान में टीनशेड के नीचे कक्षाएं संचालित हो रही हैं।

प्रधानाध्यापक अनंत अग्रवाल ने बताया स्कूल में कुल 39 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल जर्जर होने के कारण ध्वस्त हो गया, निर्माण अभी तक नहीं शुरू हुआ है।विभाग को इसकी सूचना है। प्रधान मुनेश देवी ने बताया बच्चों की बेहतर शिक्षण व्यवस्था के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी व्यवस्थाएं पूरी होंगी।

agra school small

फतेहाबाद प्रथम प्राथमिक विद्यालय में जमीन पर टाट-पट्टी बिछा पढ़ाई करते बच्चे। जागरण

 स्कूल में 152 बच्चे लेकिन बैठने के लिए नहीं हैं व्यवस्थाएं

अछनेरा ब्लॉक के भरतपुर रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय-2 में प्रधानाचार्या रजनी कुमारी ने बताया स्कूल में 152 बच्चे पंजीकृत हैं। लेकिन बैठने की व्यवस्था नहीं है, इसलिए बच्चे टाट-पट्टियों पर बैठकर पढ़ाई कराई जा रही है। तीन वर्ष से अधिकारियों को बताया जा रहा है, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं। मिड-डे मील का पैसा भी समय पर नहीं पहुंचता।
फतेहपुर सीकरी ब्लॉक के नयावास समेत दो दर्जन से विद्यालयों पढ़ने के लिए टेबल और बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं है। प्रधानाध्यापकों की ओर से खंड शिक्षा अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक वर्ष पहले किया गया था। इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। प्राथमिक स्तर तक बच्चे जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करते हैं।
पिनाहट ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय गुर्जा में कुल 120 छात्र पंजीकृत हैं। मंगलवार को 30 बच्चे उपस्थित रहें, सभी जमीन पर बैठ पढ़ाई करते नजर आए।

ब्लॉक, कितने विद्यालयों में फार्नीचर की कमी

  • अछनेरा 41
  • अकोला 18
  • बाह 19
  • बरौली अहीर 48
  • बिचपुरी 03
  • एत्मादपुर 47
  • फतेहाबाद 18
  • फतेहपुर सीकरी 40
  • जगनेर 37
  • जैतपुर कला 11
  • खंदौली 11
  • खेरागढ़ 25
  • पिनाहट 17
  • सैंया 02
  • शमसाबाद 05

कुल 342

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परिषदीय विद्यालय में फर्नीचर नहीं होने से छात्र-छात्राओं को समस्या का सामना करना पड़ता है। उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। वर्षों से जमीन पर बैठ पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

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शिवहरि मुद्गल, ग्रामीण, फतेहाबाद

जब तक परिषदीय विद्यालयों में व्यवस्था दुरुस्त नहीं होगी तब तक नामांकन नहीं बढ़ सकते। इस तरह की लचर व्यवस्था को पहले बेहतर करना होगा। उसके बाद नामांकन पर ध्यान देना होगा।

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चौधरी नौनिहाल सिंह, ग्रामीण, फतेहपुर सीकरी

बच्चे जब नीचे बैठकर पढ़ते हैं तो गर्दन पूरी नीचे झुकी होती है। इससे गर्दन में तेज दर्द होने संभावना बढ़ जाती है। बच्चे की पढ़ाई के दौरान पीठ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। कुर्सी होनी चाहिए, घुटने 90 अंश में मुड़े होना चाहिए और गर्दन हल्की झुकी होनी चाहिए। जिससे बढ़ती उम्र में उन्हें किसी प्रकार की समस्या न हो। नीचे बैठने से भूख न लगने की भी समस्या होती है।

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डॉ. अरुण जैन, बाल रोग विशेषज्ञ

जब बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं, तो वे अपनी गर्दन को 60 डिग्री तक नीचे झुका लेते हैं। इस मुद्रा के कारण उनकी गर्दन की नाजुक हड्डियों और रीढ़ पर लगभग 27 किलोग्राम का अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

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डॉ. रजत कपूर, हड्डी रोग विशेषज्ञ

जिले में 17 हजार फर्नीचर सेट की कमी थी। जिसे पूरा किया जा रहा है। अभी छह हजार सेट की पूर्ति हो गई है, शेष 11 हजार की पूर्ति जल्द होगी। जल्द ही सभी विद्यालयों की समस्या दूर होगी।

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डॉ. राकेश कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी