आगरा, जागरण संवाददाता। हाथों में जंजीर और बदन पर लहू, आंखों में आंसू और जुबां पर या हुसैन या अली। रास्ते में गूंजते नौहा और युवाओं का मातम देख ख्वातीन भी रोने लगीं। ये आलम शाम को शाहगंज चौराहे का था।

अंजुमन-ए-पंजतनी की ओर से सोमवार को शाहगंज के चिल्लीपाड़ा स्थित पुराना इमामबाड़े में सुबह से चेहल्लुम मजलिसों का दौर चला। मौलाना अली रिजवान ने शहीद-ए-करबला हजरत इमाम हुसैन की शहादत के पहलुओं पर रोशनी डाली। मौलाना ने फरमाया कि करबला में सत्य व असत्य की जंग थी। जालिम व मजलूमियत की थी। यह मानवता व दानवता की जंग थी। उन्होंने कहा कि इस जंग में इमाम हुसैन ने अपनी व साथियों की शहादत दी और यह साबित कर दिया कि अंत में सत्यता व मानवता की ही जीत होती है। अब यजीद की कब्र का भी पता नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर से तीन करोड़ से ज्यादा लोग इमाम हुसैन की मजार पर हाजिरी देने पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि जो शख्स किसी को तकलीफ नहीं पहुंचाता, वह सच्चा हुसैनी होता है। इसके बाद अलम व शबीह ताबूत का जुलूस निकाला। इसकी शुरुआत जैनब लिपट के रोई अब्बास के अलम ..नौहे से हुई। जो वरिष्ठ अधिवक्ता अमीर अहमद, अली अफसर अब्बास अमीर सैफ़ रिजवी ने पेश किया। इसके बाद अंजुमन-ए-पंजतनी सेंथल के नौहाख्वान इब्ने हसन व अंजुमन-ए-अब्बासिया जलालपुर के नौहाख्वान कमर अब्बास ने बेहतरीन सलाम और नौहे पेश किए। जुलूस में या हुसैन या अली की आवाज गूंजती रही, तो लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे। शाहगंज चौराहे पर मातमदारों ने जंजीर व कमा से मातम किया। यह जुलूस लोहामंडी रोड मुहल्ला कुरैशियान होते हुए इमामबाड़ा वक्फमीर नियाज अली पर जाकर रोके कहो अहले अजा अलविदा. नौहे के समाप्त हुआ। इसमें अंजुमन के अध्यक्ष मसूद मेहंदी, सचिव मुहम्मद अहमद, उपाध्यक्ष ताहिर जैदी, हुसैन मेहंदी, शबी जाफरी, अली हैदर, हादी हसन जाफरी, डॉ नसीम जैदी आदि मौजूद रहे।

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