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आगरा, जागरण संवाददाता। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से मंटोला निवासी कई परिवार भी काफी दुखी हैं। उनका पूर्व विदेश मंत्री से एक नाता था। यह नाता हज यात्रा से बना था। पूर्व विदेश मंत्री ने इन्हें विशेष कोटे से हज यात्रा के लिए भेजा था।

मंटोला निवासी मोहम्मद जाहिद ने वर्ष 2015 में हज पर जाने के लिए आवेदन किया था। मगर, हज पर जाने वाले लोगों की सूची में उनका नाम नहीं था। उन्होंने बताया कि किसी ने उन्हें बताया कि प्राइवेट टूर एजेंसी द्वारा हज के लिए कोटा दिलाया जाता है। उन्होंने उस एजेंसी से भी संपर्क किया, लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया था। इसके बाद किसी ने उन्हें सलाह दी कि विदेश मंत्री विशेष कोटे से हज पर जाने की अनुमति प्रदान कर सकती हैं। उस समय सुषमा स्वराज विदेश मंत्री थीं। उनके बारे में सुना था कि वह लोगों की मदद करने वाली हैं, ऐसे में उम्मीद लेकर उनसे मुलाकात करने पहुंचे। उन्होंने बहुत अच्छी तरह से उनकी बात सुनी और हज पर जाने के लिए अनुमति भी दिलाई। हज करने के बाद वह लौटकर उनका शुक्रिया अदा भी करके आए थे। उनका कहना है कि उनके निधन से बहुत दुख हुआ है। उनके कारण ही हज पर जाना मुमकिन हुआ था।

गाड़ी में बैठे-बैठे कर दिए थे आदेश
2017 में शाहगंज निवासी बिलाल का भी हज की सूची में नाम नहीं था। वह मो. जाहिद को साथ लेकर विदेश मंत्री से मिलने पहुंचे थे। व्यस्तता के चलते मुलाकात नहीं हो सकी। जब वह शाम को अपने कार्यालय से बाहर निकलीं तो इन्हें बाहर बैठा देखा। बुलाकर पूछा। पूरी बात सुनने के बाद गाड़ी में बैठे-बैठे ही अनुमति दे दी।

पासपोर्ट कार्यालय खुलवाने में भी निभाई थी विशेष भूमिका
पूर्व विदेश मंत्री ने ताजनगरी में पासपोर्ट कार्यालय खुलवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। एससी आयोग के अध्यक्ष व तत्कालीन आगरा सांसद रामशंकर कठेरिया ने उनके सामने आगरा की जनता की समस्या को रखा था। उन्होंने जनता की परेशानी को देखते हुए यहां पर पासपोर्ट कार्यालय खोलने की अनुमति दी थी।

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