आगरा, जागरण संवाददाता। राजकुमार शर्मा, ये वह शख्स हैं जो सुलहकुल की नगरी से योग की पताका पूरी दुनिया में फहरा रहे हैं। अमेरिका हो या फिर ब्राजील, दुबई हो या फिर मलेशिया, हर कोई राजकुमार की योग शिक्षा का कायल है। गुयाना के राष्ट्रपति ने तो इनसे योग की न केवल शिक्षा ली, बल्कि उसे अपनी दिनचर्या में शामिल भी किया।

पश्चिमपुरी निवासी योग गुरु राजकुमार शर्मा अब तक करीब 15 देशों और कई छोटे द्वीपों में योग सिखा चुके हैं। मूलत: इरादतनगर के रहने वाले राजकुमार शर्मा ने आगरा कॉलेज से बीएससी कर केवल्यधाम, पुणे से योग का डिप्लोमा किया। वहीं चार माह असिस्टेंट टीचर रहे। बाद में उनकी नियुक्ति यूजीसी के जरिए गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, जामनगर में हुई। यहां छह वर्ष तक सेवाएं दीं। आगरा में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का 15 वर्ष तक संचालन किया। इसके बाद भारत सरकार के अधीन इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) से योगा एक्सपर्ट नियुक्त होकर साउथ अमेरिका के गुयाना देश में करीब तीन वर्ष तक योग का प्रचार-प्रसार किया।

गुयाना के तत्कालीन राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को भी कराया योग

राजकुमार शर्मा ने बताया कि उन्हें गुयाना के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड रामौतार, तत्कालीन प्रधानमंत्री सेम्युल हाइन्ड को योग सिखाने का मौका मिला। इसके अलावा यूएसए के राजदूत की पत्नी, यूरोप के राजदूत एवं उनकी पत्नी, मेक्सिको के राजदूत की पत्नी, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पत्नी आदि को योग सिखाया।

कई देशों में गए योग सिखाने

गुयाना के अलावा ट्रिनीडाड टुबैगो, बारबाडोस, डोमिनिका, एंगुइला आदि देशों में भी योग का प्रचार किया। साउथ अमेरिका के छोटे द्वीपों में शामिल वारवीस, एस्किवो, लैग्वान, पारिका आदि में भी जाने का मौका मिला। अमेरिका, नेपाल, मलेशिया, ब्राजील, दुबई, आबूधावी में भी योग सिखाने जा चुके हैं।

1996 में लगाया था पहला कैम्प

राजकुमार शर्मा ने कोठी मीना बाजार में 1996 में पहला कैम्प लगाया था। इसमें बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने भी भाग लिया था। वे कहते हैं कि योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि वो विज्ञान है जो समाज और देश को एक बेहतर मानव दे सकता है।

योग गुरु को देख हुए प्रभावित

राजकुमार शर्मा ने बताया कि 1993 में चौबे हॉस्टल में एक योग गुरु योग सिखाने आए थे। उन्हें देखकर वह प्रभावित हुए और इस क्षेत्र में जाने का मन बनाया। डिप्लोमा इन योगा एजूकेशन करने के बाद प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथैरेपी का कोर्स भी किया। राजकुमार शर्मा कहते हैं कि आमतौर पर 90 फीसद लोग योग के नाम पर एक्सरसाइज करते हैं। कारण उन्हें योग और एक्सरसाइज में अंतर ही नहीं पता। ऐसे लोग योग करवा रहे हैं, जिनके पास डिग्री तक नहीं है। 

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Posted By: Prateek Gupta

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