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प्लास्टिक के बर्तन में गर्म खाना या चाय- कॉफी, तुरंत कर दें बंद; गर्भावस्था में होता है डायबिटीज का खतरा

By Ajay Dubey Edited By: Prateek Gupta
Published: Wed, 08 Apr 2026 02:30 PM (IST)

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के एक अध्ययन में सामने आया है कि गर्म भोजन या पेय पदार्थों के लिए ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

जागरण संवाददाता, आगरा। गर्मागर्म खाना और चाय- काॅफी को रखने के साथ ही खाने के लिए प्लास्टिक के डिब्बे और कप का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह गर्भवती के लिए घातक हो रहा है।

गर्म होने से प्लास्टिक से निकल रहे बिस्फेनाल-ए शरीर में पहुंच रहे हैं, इससे गर्भावस्था में मधुमेह की बीमारी हो रही है। यह एसएन मेडिकल कालेज में अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 186 गर्भवती पर की गई स्टडी में सामने आया है।

एसएन मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग में गर्भावस्था में डायबिटीज (जेस्टेशनल डायबिटीज) के कारण जानने के लिए अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 तक स्टडी की गई। मेडिसिन विभाग के प्रो. प्रभात अग्रवाल के निर्देशन में जूनियर डाक्टर तृतीय वर्ष शिव कुमार ने स्टडी की।

स्त्री रोग विभाग में आने वाली सभी गर्भवती की मधुमेह की जांच कराई गईं। 186 गर्भवती को स्टडी में शामिल किया गया। इसमें से 83 गर्भवती ऐसी थी जिनका शुगर का स्तर 140 से कम (खाने खाने के बाद) और 83 गर्भवती का शुगर का स्तर 160 से 200 के बीच में था।

इन्हें जेस्टेशनल डायबिटीज थी। काउंसिलिंग में सामने आया कि गर्भधारण करने से पहले मधुमेह की बीमारी नहीं थी। सभी 186 गर्भवती में बिस्फेनाल-ए का स्तर पता करने के लिए पेशाब की जांच कराई गई।

जिन गर्भवती का शुगर का स्तर सामान्य था उनमें बिस्फेनाल-ए की अधिकतम मात्रा 14.19 मिली। वहीं, जेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित गर्भवती में बिस्फेनाल-ए का अधिकतम स्तर 41.17 तक मिला।

प्रो. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि प्लास्टिक को सख्त बनाए रखने के लिए बिस्फेनाल-ए का इस्तेमाल किया जाता है, यह पानी में घुलनशील है। एक की प्लास्टिक के बाक्स बार बार गर्म खाना रखने से बिस्फेनाल-ए उसमें घुल जाता है।

इसी तरह से चाय के कप में भी बिस्फेनाल-ए घुल जाता है। बिस्फेनाल-ए घुले खाने और चाय पीने से यह शरीर में पहुंच जाता है। इससे बीटा सेल्स प्रभावित हो रही हैं और मधुमेह की बीमारी हो रही है।

गर्भावस्था में मधुमेह घातक, लगवानी पड़ रही इंसुलिन 

गर्भावस्था में मधुमेह गर्भवती के साथ ही गर्भस्थ शिशु के लिए घातक होता है। गर्भावस्था में शुगर का स्तर नियंत्रित करने के लिए टेबलेट नहीं दी जाती हैं, इंसुलिन इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं।

95 प्रतिशत में प्रसव के बाद शुगर का स्तर सामान्य हो जाता है लेकन पांच प्रतिशत में मधुमेह की आशंका रहती है। वहीं, दूसरी बार गर्भधारण होने पर 90 प्रतिशत में जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा रहता है।