आगरा, जागरण संवाददाता। टैक्स चोरी करने वाले शातिरों की अब खैर नहीं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर की चोरी पकड़ने के लिए अब पुख्ता इंतजाम कर लिया गया है। ऐसे लोगों की जानकारी साझा करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) के बीच एक सहमति पत्र (मेमोरेंडम अॉफ अंडरस्टैंडिंग) (एमओयू) साइन किया गया।

इसका उद्देश्य यह होगा कि अब दोनों बोर्ड अब नियमित रुप से एक-दूसरे से संबंधित आंकड़ों को सहज रुप से साझा करेंगे। यह एमओयू वर्ष 2015 में सीबीडीटी और तत्कालीन केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के एमओयू का स्थान लेगा। तब से लेकर अब तक कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो चुके हैं, जिनमें जीएसटी लागू करना, जीएसटीएन को शामिल करना, केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड का नाम बदल कर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड करना शामिल है। लिहाजा सारे बदलावों को भी इसमें शामिल कर लिया गया।

ऐसे होगा प्रभावी

सीए प्रार्थना जालान ने बताया कि इस एमओयू सेे सीबीडीटी और सीबीआइसी के बीच डाटा व सूचनाओं का स्वत: व नियमित आदान-प्रदान संभव होगा। साथ ही सीबीआइसी अनुरोध किए जाने पर तुरंत अपने संबंधित डेटाबेस में उपलब्ध ऐसी किसी जानकारी का भी एक-दूसरे के साथ आदान-प्रदान करेंगे, जिसकी उपयोगिता दूसरे संंगठन के लिए हो सकती है। आज हस्ताक्षर होने के बाद से यह लागू हो गया। इसके लिए एक डेटा आदान-प्रदान संचालन समूह का गठन किया जाएगा, जो इसकी डाटा की समीक्षा करने व डेटा साझाकरण व्यवस्था की प्रभावशीलता को बेहतर बनाएगा।

यह होगा फायदा

इसका फायदा यह होगा कि जो कारोबारी अब तक अपनी चालाकी या गलत तरीकों से टैक्स चोरी करते थे और कारोबार के हिसाब से टैक्स नहीं भरते थे, वे अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। जरुरत होने पर आयकर विभाग और जीएसटी या सीमा शुल्क विभाग जरुरी जानकारी साझा कर उन पर शिकंजा कस पाएंगे।

 

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