Taj Mahal: एक बार फिर कैरिंग कैपेसिटी निर्धारण की तैयारी, नीरी ने भी की थी सालभर पहले सिफारिश
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 19 से 25 नवंबर तक विश्व धरोहर सप्ताह मनाएगा। ताजमहल से एएसआई को भारी आय होती है, लेकिन संरक्षण पर कम ध्यान दिया जा रहा है। म ...और पढ़ें

ताजमहल
जागरण संवाददाता, आगरा। सुप्रीम कोर्ट में विजन डाक्यूमेंट पर दाखिल कार्य योजना में ताजमहल के सैकड़ों वर्षों तक संरक्षण के लिए उसकी कैरिंग कैपेसिटी (वहन क्षमता) निर्धारित करने का सुझाव सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने दिया है। राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियांत्रिकी शोध संस्थान (नीरी) ने एक वर्ष पूर्व ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी निर्धारित करते हुए कई सुझाव दिए थे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने उनमें से अपने हित के सुझाव तो माने, लेकिन भीड़ प्रबंधन से जुड़े अन्य सुझावों की अनदेखी कर दी। अब सीईसी की संस्तुति के बाद विभाग ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी का निर्धारण नए सिरे से करने को अध्ययन कराएगा। आगरा किला व फतेहपुर सीकरी की कैरिंग कैपेसिटी तय करने को भी अध्ययन किया जाएगा।
ताजमहल पर भीड़ का प्रबंधन बड़ी चुनौती है। पर्यटन सीजन में प्रतिदिन 30 से 35 हजार पर्यटक स्मारक देखने आते हैं, जबकि दीर्घ सप्ताहंत (लांग वीकेंड) में यह संख्या 40 से 45 हजार तक पहुंच जाती है। इसमें निश्शुल्क प्रवेश पाने वाले 15 वर्ष तक के बच्चे शामिल नहीं हैं।
एक दशक पूर्व यमुना में जल संकट और ताजमहल की सीढ़ियों के पत्थरों पर घिसने से स्मारक को भीड़ से हो रहे नुकसान से बचाने को वर्ष 2014 में एएसआइ ने नीरी से अध्ययन कराया था। नीरी ने वर्ष 2015 में कैरिंग कैपेसिटी तय करते हुए अपनी रिपोर्ट एएसआइ को सौंपी थी। एएसआइ ने तीन वर्ष तक नीरी की सिफारिशों को नहीं माना।
स्टेप टिकटिंग की सिफारिश को एएसआइ ने 10 दिसंबर, 2018 को मानते हुए मुख्य मकबरे पर 200 रुपये का अतिरिक्त प्रवेश शुल्क लागू कर दिया। स्मारक के पूर्वी व पश्चिमी गेट पर टर्न स्टाइल गेट लगाकर क्यूआर कोड युक्त टिकट को स्कैन करने की व्यवस्था की गई। तीन घंटे से अधिक समय तक रुकने वाले पर्यटकों पर जुर्माने का प्रविधान किया।
यह सभी एएसआइ की आय बढ़ाने वाले उपाय थे। नीरी की अन्य सिफारिशों को एएसआइ ने नहीं माना, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण पर्यटकों की संख्या निर्धारित करने का था। यही वजह है कि अब भीड़ प्रबंधन के लिए सीईसी ने विजन डाक्यूमेंट पर सुप्रीम काेर्ट में दाखिल कार्य योजना में ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी समेत अन्य स्मारकों की कैरिंग कैपेसिटी तय करने की अनुशंसा की है।
उसने ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी पर विशेष ध्यान देने और द्वितीयक श्रेणी के पांच स्मारकों व स्थलों को विकसित करने पर जोर दिया है।
नीरी ने एक दशक पूर्व की थीं यह सिफारिशें
- ताजमहल में एक घंटे में अधिकतम छह हजार पर्यटकों को प्रवेश दिया जाए।
- पर्यटकों को स्मारक मे अधिकतम डेढ़ घंटे तक रुकने की अनुमति दी जाए।
- निर्धारित समय से अधिक समय तक रुकने वाले पर्यटकों पर अर्थदंड लगाया जाए।
- स्मारक में एक समय में पर्यटक किसी भी दशा में नौ हजार से अधिक नहीं हों। यह स्थिति भी खतरनाक है।
- ताजमहल में पर्यटकों की संख्या नौ हजार तक पहुंचने से पूर्व ही उन्हें बाहर निकालना शुरू कर दिया जाए।
- प्रवेश द्वारों पर स्मारक में उपस्थित पर्यटकों की संख्या बताने वाले इलेक्ट्रोनिक बोर्ड लगाए जाएं।
- एएसआइ के कार्यालय व केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के कंट्रोल रूम में भी डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं।
- पर्यटकों के प्रवेश व निकास के समय बार कोड को स्कैन करने की व्यवस्था हो।
- अधिक भीड़ उमड़ने पर मुख्य मकबरे पर पर्यटकों के प्रवेश को रोका जाए।
- मुख्य मकबरे पर भीड़ प्रबंधन को अलग से टिकट लागू किया जाए।
वैष्णो देवी के समान हो प्रवेश व्यवस्था
वैष्णो देवी के दर्शन को प्रतिवर्ष ताजमहल से अधिक श्रद्धालु आते हैं। वहां ताजमहल की तरह किसी तरह की अव्यवस्था नहीं होती है। वैष्णो देवी की यात्रा शुरू करने से पहले कटरा में पंजीकरण कराना होता है, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं लगता है। पंजीकरण के बाद एक यात्रा पर्ची मिलती है। पंजीकरण के दौरान एक आरएफआइडी कार्ड भी दिया जाता है, जो प्रवेश के लिए आवश्यक है। पंजीकरण पर्ची मिलने के बाद भक्तों को छह घंटे के भीतर बाणगंगा में पहली चेक-पोस्ट पार करनी होती है। एक दिन में ताजमहल देखने वाले पर्यटकों की संख्या निर्धारित कर और आनलाइन टिकट बुकिंग साेफ्टवेयर से इसकी व्यवस्था की जा सकती है।

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