आगरा, जागरण संवाददाता। ताजमहल और आगरा किला के बीच स्थित ताज हेरिटेज कॉरीडोर पर एक वर्ष में हरियाली विकसित नहीं की जा सकी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की उद्यान शाखा पहले चरण में चुने गए 12 हेक्टेअर क्षेत्र में कछुए की गति से काम कर रही है। जबकि दूसरे चरण का काम अभी शुरू भी नहीं हुआ है।

ताज हेरिटेज कॉरिडोर दो भागों में बंटा हुआ है। यमुना में गिरने वाला मंटोला नाला, उसे दो भागों में बांटता है। आगरा किला के सामने 12 हेक्टेअर क्षेत्र है, जबकि चंद्रशेखर पार्क से ताज तक आठ हेक्टेअर क्षेत्र है। यहां पर्यावरण विकास के काम का शिलान्यास पिछले वर्ष 14 फरवरी को तत्कालीन संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा और एससी आयोग के अध्यक्ष सांसद रामशंकर कठेरिया ने किया था। पहले चरण में आगरा किला के सामने स्थित 12 हेक्टेअर क्षेत्र में मुगलकालीन चारबाग पद्धति पर हरियाली विकसित की जानी थी। डॉ. महेश शर्मा ने तब 31 मार्च, 2019 तक कॉरीडोर पर पहले चरण का काम पूरा करने के निर्देश दिए थे। मगर, यहां एक वर्ष में करीब चार हेक्टेअर क्षेत्र में ही घास, हेज व पौधे लगाए जा सके हैं। आठ हेक्टेअर क्षेत्र ऐसे ही पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में दिया था आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में ताज हेरिटेज कॉरिडोर की जमीन पर हरियाली विकसित करने के निर्देश दिए थे, जिससे कि यहां से उडऩे वाले धूल कण ताज को नुकसान नहीं पहुंचाएं। कई वर्षों तक एएसआइ ने इस पर ध्यान नहीं दिया। वर्ष 2014 के बाद इस दिशा में प्रयास शुरू किए गए। एएसआइ ने कॉरीडोर से मलबा हटवाया और फरवरी, 2019 में पर्यावरण विकास कार्य की शुरुआत हुई।

यह पौधे लगने हैं

कॉरिडोर पर जो पौधे लगाए जाने हैं उनमें रात की रानी, चमेली, मोतिया, कनेर, मुराया, बेला, हेमेलिया, तिकोमा आदि हैं। इनके साथ श्रब्स और लॉन में घास लगाई जाएगी।

फैक्ट्स कॉरिडोर

- एएसआइ को मिली है 20 एकड़ जमीन।

- पहले चरण में 12 एकड़ जमीन पर कर रहे काम।

- 58.12 लाख रुपये की लागत से 31 मार्च तक करना है काम।

- 1.04 करोड़ रुपये से की गई थी कॉरिडोर पर सफाई। 

Posted By: Tanu Gupta

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