आगरा, निर्लोष कुमार। सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन में ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) को दूसरी बड़ी राहत प्रदान की। बुधवार को सिविल एन्क्लेव के निर्माण को हरी झंडी देने के बाद शुक्रवार को कोर्ट ने टीटीजेड में लागू यथा स्थिति को हटा दिया। इससे यहां जनोपयोगी योजनाओं के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। यहां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) और सेंट्रल इंपॉवर्ड कमेटी (सीईसी) की संस्तुति पर अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में ही हो सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने राज्य सरकार द्वारा टीटीजेड में लागू यथा स्थिति के आदेश को स्पष्ट करने को दायर की गई याचिका पर यह आदेश किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 मार्च, 2018 को विजन डॉक्यूमेंट से संबंधित मामले में टीटीजेड में यथा स्थिति का आदेश किया था। बेंच ने राज्य सरकार की ओर से पेश हुईं एडिशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्या भाटी और पर्यावरणविद अधिवक्ता एमसी मेहता की दलीलों को सुना। कोर्ट के पुराने आदेशों के साथ ही कमिश्नर द्वारा दाखिल किए गए एफिडेविट का अध्ययन किया। राज्य सरकार ने अस्थायी यथा स्थिति के आदेश के चलते जनोपयोगी पेयजल आपूर्ति, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, ड्रेनेज सिस्टम, सॉलिड वेस्ट डिस्पोजल, कॉमन एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट, बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फेसिलिटी, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को संबंधित विभाग अनुमति नहीं दे पाने की बात कही थी। जबकि यह जनता के मूलभूत अधिकार हैं। इस पर बेंच ने टिप्पणी की कि अगर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होगा तो नई प्रदूषित सामग्री बढ़ेगी, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगी।

बेंच ने टीटीजेड में गैर प्रदूषणकारी और ईको-फ्रेंडली सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योगों की स्थापना को सशर्त अनुमति प्रदान की है। उनकी स्थापना अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में ही हो सकेगी। इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति प्रक्रिया पूरी कराने के बाद नीरी और सीईसी की संस्तुति लेनी होगी। ईको-फ्रेंडली व गैर-प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को लगाने के लिए राज्य व जिम्मेदार विभाग अनुमति प्रदान कर सकेंगे। इसमें उन्हें 30 दिसंबर, 1996 के टीटीजेड से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेश, पर्यावरण नियमों का अनुपालन करना होगा। सीईसी और नीरी की राय अनिवार्य होगी। भारी उद्योगों को अनुमति व शिफ्टिंग पर विजन डॉक्यूमेंट पर अंतिम निर्णय होने तक यथा स्थिति का आदेश प्रभावी रहेगा।

10400 वर्ग किमी क्षेत्र में है टीटीजेड

टीटीजेड ताज की 50 किमी की परिधि में 10400 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है। इसमें उप्र के आगरा, मथुरा, फीरोजाबाद, हाथरस, एटा और राजस्थान का भरतपुर शामिल हैं।

विजन डॉक्यूमेंट में विलंब पर हुआ था यथा स्थिति का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) अथॉरिटी में लागू यथा स्थिति को हटाकर बड़ी राहत दी है। यथा स्थिति का आदेश पर्यटन विभाग की शिल्पग्राम में मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण को 11 पेड़ काटने को अनुमति मांगने की याचिका पर विजन डॉक्यूमेंट का फस्र्ट ड्राफ्ट जमा होने तक के लिए हुआ था।

उप्र पर्यटन विभाग द्वारा शिल्पग्राम पार्किंग में मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जा रही है। इसके निर्माण में बाधक 11 पेड़ों को काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पर्यटन विभाग द्वारा जुलाई, 2017 में याचिका दाखिल की गई थी। 23 अक्टूबर, 2017 को इस पर पहली सुनवाई हुई। 24 अक्टूबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने पार्किंग को ढहाने का आदेश कर दिया। 27 अक्टूबर, 2017 को राज्य सरकार द्वारा पर्यावरण बचाने को पॉलिसी जमा करने पर कोर्ट ने पार्किंग ढहाने के आदेश पर रोक लगा दी। 15 नवंबर व 20 नवंबर, 2017 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जमा की गई पॉलिसी को मानने से इन्कार कर दिया था। आठ दिसंबर, 2017 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल और उसके पर्यावरण के सदियों तक संरक्षण को विजन डॉक्यूमेंट तैयार कर दाखिल करने का आदेश किया। इसके बाद विजन डॉक्यूमेंट तैयार कराने को कवायद शुरू हुई।

जनवरी, 2018 के पहले सप्ताह में आगरा में पर्यावरणविद अधिवक्ता एमसी मेहता, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के साथ मंथन किया गया। राज्य सरकार ने एसपीए को विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने का काम सौंप दिया। 22 मार्च, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने विजन डॉक्यूमेंट का फस्र्ट ड्राफ्ट जमा नहीं किए जाने तक टीटीजेड में यथा स्थिति का आदेश कर दिया। इस आदेश के बाद यहां बड़े प्रोजेक्ट्स को एनओसी देने में टीटीजेड अथॉरिटी, पर्यावरण मंत्रालय ने हाथ खड़े कर दिए। जुलाई, 2018 में विजन डॉक्यूमेंट का फस्र्ट ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा किया गया। फाइनल ड्राफ्ट फरवरी 2019 में और अप्रैल, 2019 में राज्य सरकार का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में जमा हुआ।

दोबारा दाखिल करनी है याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर, 2018 को पर्यटन विभाग की 11 पेड़ों को काटने की याचिका निस्तारित कर दी थी। उसे नए सिरे से विजन डॉक्यूमेंट दाखिल होने के बाद याचिका करने को कहा गया था। पर्यटन विभाग मल्टीलेवल पार्किंग के निर्माण को पेड़ काटने की अनुमति लेने को दोबारा याचिका दाखिल करेगा।

नौ करोड़ रुपये हो चुके हैं खर्च

शिल्पग्राम में सपा सरकार में ताज ओरिएंटेशन सेंटर के निर्माण का शिलान्यास पांच जनवरी, 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने इसे 52 करोड़ रुपये से केवल मल्टीलेवल पार्किंग तक सीमित कर दिया गया। पार्किंग के निर्माण पर नौ करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। केंद्रीय अधिकारिता समिति (सीईसी) के निरीक्षण के बाद यहां 20 मई, 2017 से काम रुका हुआ है।

तदर्थ रोक पर अब सरकार के पाले में गेंद

ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) को यथा स्थिति की बाधा से सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है। इसके बाद यहां लागू तदर्थ रोक पर सरकार के पाले में गेंद पहुंच गई है। तदर्थ रोक केवल पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय की बैठक के बाद लागू कर दी गई थी। इसकी स्थिति पर सरकार अब निर्णय करेगी।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उद्योगों की कैटेगरी में मार्च, 2016 में संशोधन किया था। पूर्व की ग्रीन, ऑरेंज व रेड कैटेगरी में नई कैटेगरी व्हाइट को जोड़ दिया था। टीटीजेड में केवल व्हाइट कैटेगरी में आने वाले 36 उद्योगों को ही अनुमन्य किया गया था। टीटीजेड में अनुमन्य रहे ग्रीन कैटेगरी में शामिल जूता, होटल, कोल्ड स्टोरेज आदि की स्थापना व विस्तार पर यहां रोक लग गई थी। 22 मार्च, 2018 को यथा स्थिति के आदेश के बाद तो सभी प्रोजेक्ट्स ठंडे बस्ते में चले गए थे। इस बीच जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों, शहरवासियों के प्रयासों से व्हाइट कैटेगरी में उद्योगों की संख्या को 36 से बढ़ाकर 156 कर दिया गया था। आगरा में तदर्थ रोक, सुप्रीम कोर्ट के यथा स्थिति के आदेश के बावजूद नहीं हट पा रही थी।

ईको-फ्रेंडली उद्योगों को भी नीरी व सीईसी से लेनी होगी अनुमति

ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब गैर-प्रदूषणकारी और ईको-फ्रेंडली उद्योगों की स्थापना को भी नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) और सेंट्रल इंपॉवर्ड कमेटी (सीईसी) की अनुमति अनिवार्य होगी। अब तक संबंधित विभागों व टीटीजेड की अनुमति से ही काम चल जाता था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगरा में केवल सूक्ष्म, लघु व मध्यम श्रेणी के गैर-प्रदूषणकारी व ईको-फ्रेंडली उद्योगों को अनुमति देने की बात कही है। पहले से पर्यावरण संबंधी बंदियों से जूझ रहे आगरा के उद्योगों के लिए अब यहां स्थिति और जटिल हो जाएगी। यहां वर्तमान में केवल व्हाइट श्रेणी के उद्योग ही अनुमन्य हैं। उन्हें संबंधित विभागों से अनुमति लेने के बाद टीटीजेड से अनुमति प्राप्त करनी होती थी। उद्योगों की शिफ्टिंग को भी नीरी और सीईसी की अनुमति आवश्यक होगी। कोर्ट ने आवासीय क्षेत्र से औद्योगिक क्षेत्र में शिफ्टिंग की गो¨वद ग्लास की याचिका को खारिज कर दिया है।

नए स्‍थान पर नहीं हो पाएगी नए उद्योगाेें की स्‍थापना  

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि गैर-प्रदूषणकारी और ईको-फ्रेंडली उद्योगों की स्थापना अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में ही हो सकेगी। इससे स्पष्ट है कि नए स्थान पर उद्योगों की स्थापना नहीं हो पाएगी।

डॉ. शरद गुप्ता, पर्यावरणविद

उद्योगों के लिए अब यह होगा क्राइटेरिया

- नीरी

- सीईसी

- अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र

- गैर-प्रदूषणकारी

- ईको फ्रेंडली

रियल एस्टेट को मिलेगी ऑक्सीजन

यथा स्थिति हटने से रियल एस्टेट को निश्चित ही ऑक्सीजन मिलेगी। पूर्व की तरह फिर से पांच हजार वर्ग मीटर से अधिक के नक्शे पास होंगे। इससे एडीए को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इस सब के बीच पीएम शहरी आवास योजना को भी जीवंत किया जाएगा। इससे गरीबों को आवास मिल सकेंगे। बिल्डर और एडीए मिलकर दस हजार आवास बनाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यथा स्थिति लागू हुई थी। इससे बीस हजार वर्ग मीटर के बदले पांच हजार वर्ग मीटर तक के नक्शे ही पास हो रहे थे। इस कारण आधा दर्जन प्रोजेक्ट धड़ाम हो गए थे। नक्शा पास न होने पर बिल्डरों ने जमा राशि मांगना शुरू कर दिया था। सबसे बड़ा झटका पीएम आवास योजना को लगा था। इस योजना के तहत दस हजार आवास बनने थे, जिसमें एडीए को तीन हजार और बिल्डरों के सहयोग से सात हजार आवास बनाए जाने थे। नक्शा पास न होने के चलते बिल्डरों और एडीए ने प्रोजेक्ट को ड्रॉप कर दिया। एडीए को बुढ़ाना में 33 करोड़ से 856 आवास बनाने थे। इसके लिए बीस करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। नक्शा पास न होने पर धनराशि शासन को लौटा दी गई थी। अब यथा स्थिति हटने के बाद फिर से बड़े प्रोजेक्ट का नक्शा पास हो सकेगा।

टीटीजेड से इंडस्ट्री निर्माण पर लगी रोक हट गई है। उम्मीद है एमएसएमई विकास को नई दिशा मिलेगी, सालों से रुका विकास रफ्तार पकड़ेगा। टीटीजेड क्षेत्र को संजीवनी मिलने से खुश हैं।

दीपक अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री, लघु उद्योग भारती

इंडस्ट्री निर्माण पर लगी रोक हटना स्वागत योग्य कदम। उम्मीद है जूता उद्योग जल्द ही ग्रीन से व्हाइट कैटेगिरी में आएगा, जिसके लिए हम प्रयासरत हैं। उद्योगों को गति मिलने से शहर का विकास और रोजगार रफ्तार पकड़ेगा।

शाहरू मोहसिन, जूता निर्यातक

सराहनीय कदम, एमएसएमई निर्माण की अनुमति मिलने से शहर की बड़ी चिंता खत्म हुई। अब तदर्थ रोक हटने का इंतजार है, जिसे सरकार पर छोड़ा गया है। वह हटे, तो रोजगार और विकास तेजी से बढ़े।

भूपेंद्र सिंह सोबती, अध्यक्ष, प्लास्टिक पैकेजिंग मैन्यूफेक्चर्स एसोसिएशन

एमएसएमई स्थापित हो पाएंगे। पहले एनओसी के लिए चकरधिन्नी बन जाते थे, उत्पीड़न होता था। अब बाधाएं खत्म होने से नए बैंचर लगेंगे और बिजनेस बढ़ेगा। प्रदूषण रोकने में हम खुद मदद करेंगे।

उपेंद्र सिंह लवली, अध्यक्ष, आगरा शू मैन्यूफेक्चर्स एसोसिएशन

यथा स्थिति हटने से रियल एस्टेट को सबसे अधिक फायदा होगा। इससे नए बड़े प्रोजेक्ट के लिए नक्शा पास हो सकेगा।

शोभिक गोयल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष क्रेडई संस्था

कई सालों की लड़ाई रंग लाई। कई बड़े प्रोजेक्ट का नक्शा पास नहीं हो रहा था, लेकिन अब यह हो सकेगा।

भगत सिंह बघेल, पूर्व अध्यक्ष क्रेडई

पीएम आवास योजना सहित अन्य प्रोजेक्ट फिर से जीवंत हो सकेंगे। इससे रोजगार के अवसर विकसित होंगे।

किशोर गुप्ता, बिल्डर

यथा स्थिति हटने से रियल एस्टेट को फायदा होगा। वैसे भी नोटबंदी के बाद से रियल एस्टेट रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।

नीतेश गर्ग, सचिव क्रेडई

कोल्ड स्टोरेज को मिलेगी राहत

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यथा स्थिति के आदेश को हटाए जाने पर सबसे पहले राहत कोल्ड स्टोरेज को मिलेगी। पूर्व में उन्हें ग्रीन कैटेगरी में रखा गया था। जनवरी, 2018 में पर्यावरण मंत्रलय ने उन्हें व्हाइट कैटेगरी में शामिल कर दिया था। यहां पर तदर्थ रोक व यथा स्थिति के आदेश के बावजूद उन्हें अनुमति नहीं मिल पा रही थी। उनको अनुमति मिलने की राह अब आसान हो जाएगी।

इनका क्‍या है कहना

यथा स्थिति हटने से रुके पड़े प्रोजेक्ट और विकास कार्य तेजी से पूरे होंगे। सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है।

संजय अग्रवाल, प्रो. वाइस चेयरमैन जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल

यथा स्थिति रूपी पहला ताला खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट के यथा स्थिति पर आदेश के बाद तदर्थ रोक को हटाने का रास्ता साफ हो गया है।

केसी जैन, अधिवक्ता

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। इससे आगरा के विकास शुरू हो सकेगा।

राकेश गर्ग, उपाध्यक्ष लघु उद्योग निगम लिमिटेड

सुप्रीम कोर्ट का आदेश बहुत ही अच्छा है। इससे टीटीजेड में रुके सभी कार्यो को गति मिलेगी। गैस आधारित उद्योग ईको-फ्रेंडली हैं, उन्हें अनुमति मिलेगी।

उमेश शर्मा, सदस्य टीटीजेड अथॉरिटी

लड़ाई अभी लंबी है। कोर्ट के आदेशों पर सतत निगाह रखनी होगी।

संदीप अरोड़ा, अध्यक्ष आगरा टूरिज्म डवलपमेंट फाउंडेशन

आधा दर्जन से अधिक नए शीतगृह ऐसे हैं, जिनको एनओसी के लिए मुश्किल ङोलनी पड़ रही है। शीतगृह नॉन पॉल्यूटिंग इंडस्ट्री में है। इनकी रुकावट हटने और शीतगृह लगाने वालों का रास्ता साफ हुआ है।

डॉ. सुदर्शन सिंघल, अध्यक्ष, ऑल इंडिया कोल्ड स्टोरेज ऑनर्स एसोसिएशन

 

Posted By: Tanu Gupta

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