आगरा, जागरण संवाददाता। देशभर में अधर्म पर धर्म, बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयदशमी शुक्रवार को मनाया जा रहा है। शस्त्र पूजन के साथ शास्त्र पूजन हो रहा है। शाम को रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। आगरा में एक समाज ऐसा भी है, जिसने विजयदशमी पर लंकापति रावण की पूजा की। रावण के पुतले फूंकने पर आपत्ति जताते हुए अपने अंदर के रावण को मारने का आह्वान किया।

लंकापति दशानन महाराज पूजा समिति द्वारा विजयदशमी की पूर्व संध्या पर कैलाश मंदिर पर शिव तांडव स्त्रोत का पाठ किया। लंकापति रावण के स्वरूप की आरती उतारी गई। समिति संयोजक डॉ. मदन मोहन शर्मा ने कहा कि शिव तांडव स्त्रोत की रचना लंकापति रावण ने की थी। वो भगवान शिव के परम भक्त और त्रिकालदर्शी थे। ऐसे विद्वान के पुतले का दहन नहीं करना चाहिए। सारस्वत समाज रावण की पूजा करता है। उन्होंने कहा कि अपने अंदर के रावण को मारे, रावण के पुतले का दहन न करें। हिंदू धर्म में दाह संस्कार के बाद किसी का पुतला जलाया जाना गलत है। रविवार को समिति ने रामलाल वृद्ध आश्रम में हवन किया। रावण के स्वरूप में राजा खिरवार, भोलेनाथ के स्वरूप में खुशनव खिरवार रहे। समिति अध्यक्ष उमाकांत सारस्वत, डा. नरेंद्र कुमार सारस्वत, सत्यप्रकाश सारस्वत, शिवप्रसाद शर्मा, अलका सिंह, नकुल सारस्वत, दीपक सारस्वत, गौरव चौहान, अनिल चौरसिया, अनमोल सेठ, शिवम चौहान, अभय गौर मौजूद रहे।

1100 रुपये से लेकर 4000 रुपये तक के पुतले

बाजार में रावण के 1100 रुपये से लेकर 4000 रुपये तक के पुतले मिल रहे हैं। घटिया मामू-भांजा और नामनेर में दुकानों पर रावण के पांच से 11 फुट तक के पुतले उपलब्ध हैं।

चार पीढ़ियों से बना रहे रावण

पुतला बनाने वाले मुन्नालाल ने बताया कि परिवार में चार पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने का काम हो रहा है। इस बार रावण के छह से सात पुतले बनाए हैं। यह पुतले 1500 रुपये से लेकर 4000 रुपये तक के हैं।

कम मिले हैं आर्डर

पुतला बनाने वाले महेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार रावण के पुतले बनाने के कम आर्डर मिले हैं। पांच फुट ऊंचे ही पुतले बनाए हैं। 1100 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक के पुतले हैं।

Edited By: Prateek Gupta