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SN मेडिकल कॉलेज में गुर्दा रोगियों के लिए बनेगी 100 बेड की यूनिट, बढ़ेंगी डायलिसिस मशीन

By Ajay Dubey Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 11 Sep 2026 11:43 PM (GMT+05:30)

एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद मरीजों की संख्या बढ़ने से बेड की कमी हो गई है। ...और पढ़ें

आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज।

आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज।

जागरण संवाददाता, आगरा। एसएन मेडिकल काॅलेज एवं अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद मरीजों की संख्या बढ़ गई है। गंभीर हालत में गुर्दा रोगियों के भर्ती होने से बेड फुल हैं। नए मरीज भर्ती करने में समस्या आ रही है। ऐसे में अब 100 बेड की नेफ्रोलाजी यूनिट के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है।

एसएन की सुपरस्पेशियलिटी विंग में नेफ्रोलाजी विभाग में 20 बेड हैं। 22 डायलिसिस मशीन हैं। 22 अगस्त को पहला गुर्दा प्रत्यारोपण होने के बाद नेफ्रोलाजी विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गई है। ओपीडी में आगरा के साथ ही मैनपुरी, मथुरा, फिरोजाबाद, भरतपुर सहित अन्य जिलों से 70 से अधिक मरीज आ रहे हैं

इसके साथ ही गंभीर हालत में मरीज भर्ती हो रहे हैं। बेड फुल होने पर अन्य विभागों में मरीज भर्ती करने पड़ रहे हैं। वहीं, डायलिसिस यूनिट भी फुल चल रही हैं, प्रतिदिन 60 से अधिक डायलिसिस की जा रही हैं।

नेफ्रोलाजी विभाग के अध्यक्ष डा. अपूर्व जैन ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने पर 100 बेड की नेफ्रोलाजी यूनिट के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। नए मरीजों के डायलिसिस का पंजीकरण बंद है। नई यूनिट बनने से मरीज भर्ती करने में समस्या नहीं आएगी।

साथ ही डायलिसिस की क्षमता भी बढ़ेगी। एक ही जगह पर मरीजों को गुर्दा रोग संबंधी सभी बीमारियों का इलाज मिल सकेगा।

सितंबर के अंत में होगा दूसरा गुर्दा प्रत्यारोपण

गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए 16 मरीजों का पंजीकरण किया गया है। इसमें से तीन मरीज और गुर्दा देने वाले उनके स्वजन की जांच सहित अन्य प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन तीनों केस को एसजीपीजीआइ, लखनऊ की टीम से साझा किया जाएगा। वहां से टीम सितंबर अंत में आएगी और दो मरीजों के गुर्दा प्रत्यारोपण किए जाएंगे

मधुमेह और उच्च रक्तचाप से बढ़ रहे गुर्दा रोगी

गुर्दा संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। जिले में 10 निजी डायलिसिस केंद्र हैं, इन केंद्रों पर भी मरीजों की लाइन लग रही है।

नेफ्रोलाजिस्ट डा. तरुण मित्तल ने बताया कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से गुर्दा रोग बढ़ रहा है। इसके साथ ही संक्रमण और दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से भी गुर्दे की बीमारी हो रही है। प्रारंभिक अवस्था में बीमारी का पता चलने पर दवाओं से इलाज संभव है।