आगरा: सैफई परिवार में कलह हुई तो पार्टी के लड़ाके भी खेमों में बंटने लगे हैं। शिवपाल यादव के समाजवादी सेक्युलर मोर्चे की नजर अब अखिलेश यादव की सपा के लड़ाकों पर है। मोर्चे के नेता सपा के नेताओं के बराबर संपर्क में हैं। पहली बैठक में ही एक दर्जन से अधिक सपाई ने शिवपाल का 'मोर्चा' संभाल लिया। कई पार्षद और पूर्व पार्षदों की भी गुप्त बैठक होने वाली है।

समाजवादी सेक्युलर मोर्चे से ताजनगरी में सबसे अधिक नुकसान सपा को ही है। अभी तक मोर्चे में टूटकर गए लोगों में ज्यादातर उपेक्षित चल रहे सपा नेता शामिल हैं। शुक्रवार को मोर्चे की पहली बैठक हुई, तो इसमें एक दर्जन सपा नेताओं में मोर्चे का झंडा थाम लिया। सूत्रों का कहना है कि सपा से जुड़े कुछ पार्षद और पूर्व पार्षदों की भी पहले गोपनीय बैठक होगी और उसके बाद वह मोर्चे में सार्वजनिक रूप से शामिल होंगे। एक ब्लॉक प्रमुख को जिले में मोर्चे की पहले ही कमान सौंपी जा चुकी है। अभी तीन ब्लॉक प्रमुख मोर्चा नेताओं के बराबर संपर्क में हैं। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही ये मोर्चे के अधिकृत सदस्य होंगे। वहीं सपा के कुछ विधानसभा क्षेत्र के पदाधिकारी भी बराबर संपर्क में हैं। एक सप्ताह में कई सपाइयों के मोर्चे में आने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। समाजवादी मोर्चा लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन कोहली ने बताया कि एक सप्ताह में कई नए लोग मोर्चे में आएंगे।

सपा टूटती नजर आ रही है। आगरा में सपा का एक बड़ा तबका शिवापाल के साथ जाने के लिए तैयार है। यदि ऐसा होता है तो अखिलेश को मुश्किल होगी।

Posted By: Jagran