आगरा, जागरण टीम। वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के साथ ही मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला भी इन दिनों सुर्खियों में हैं। मथुरा की अदालत में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर कई याचिकाएं डाली गई हैं। एक याचिका पर मथुरा की जिला अदालत में मंजूरी दी गई है।

शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण मुगलकाल में हुअा था। याचिका में समझौता रद कर 13.37 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की गई है। मुगलकाल में औरंगजेब ने 17वीं शताब्दी के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थल पर बने मंदिर को तोड़ा और इस स्थान पर ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था।

13.37 एकड़ जमीन का है पूरा मामला

लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने वाद दायर कर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह को हटाकर पूरी 13.37 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की है। अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान की जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम है। जबकि शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी से श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने 1968 में समझौता किया था। जमीन ट्रस्ट के नाम पर होने से संस्थान को समझौता करने का अधिकार ही नहीं है, ऐसे में ये समझौता रद किया जाए और पूरी जमीन ट्रस्ट को दी जाए।

सुन्नी सेंट्रल वफ्फ बोर्ड का ये है कहना

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता जीपी निगम का कहना कि जिला जज की अदालत में वादी पक्ष को वाद के रूप में रिवीजन नहीं दाखिल करना था, बल्कि अपील दाखिल करनी थी। पहले अपील दाखिल की गई, लेकिन उसे रिवीजन में कन्वर्ट कर दिया गया, ये न्याय संगत नहीं है। इसलिए ये वाद चलने योग्य नहीं है।

1968 में हुआ था समझौता

शाही मस्जिद ईदगाह का पक्षशाही मस्जिद ईदगाह के अधिवक्ता नीरज शर्मा का कहना है कि वादी पक्ष ने पहले निचली अदालत में वाद दायर किया था, लेकिन वहां से ये कहकर वाद खारिज किया गया था कि वादी पक्ष को वाद दायर करने का अधिकार नहीं है। निचली अदालत में दायर वाद में कुछ मामलों में न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया था, उसमें आदेश की कापी नहीं लगाई गई। केवल टाइप कर आदेश लगाया है। ये मान्य नहीं है। वर्शिप एक्ट 1951 के तहत भी ये वाद चलने लायक नहीं है। समझौता 1968 में हुआ था, इतने दिन वादी पक्ष कहां रहा, समझौते के इतने वर्षों के बाद वाद दायर करने का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए ये वाद खारिज किया जाए।

सितंबर 2021 में लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने वाद दायर किया

वर्ष 2021 के सितंबर महीने में सबसे पहले लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री आदि ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दायर कर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ (अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान) और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के बीच हुए समझौते को रद कर ईदगाह हटाकर पूरी 13.37 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की थी। यहां से वाद खारिज होने के बाद जिला जज की अदालत में अपील की गई। बाद में इसे रिवीजन में तब्दील किया गया।

अबतक इन्होंने किया वाद दायर

- दिसंबर 2020 में मनीष यादव ने भगवान के भक्त के रूप में वाद दायर किया। ईदगाह हटाकर पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंप दी जाए।

- दिसंबर 2020 में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह आदि ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दायर कर किया, इसमें ईदगाह को हटाकर पूरी जमीन ठाकुर केशवदेव महाराज को सौंपने की मांग की।

-फरवरी 2021 में पवन शास्त्री ने वाद दायर कर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह हटाकर पूरी जमीन ठाकुर केशव देव को सौंपने की मांग की है। जन्मस्थान परिसर में ही ठाकुर केशव देव का मंदिर है।

-मार्च 2021 में अखिल भारत हिंदू महासभा के अनिल त्रिपाठी ने वाद दायर कर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह हटाकर परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।

-मार्च 2021 में अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह ने भी सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दायर किया। ईदगाह को हटाकर जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की।

- अखिल भारत हिंदू महामसभा के कोषाध्यक्ष दिनेश कौशिक ने सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दायर कर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह हटाकर इसे अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की।

-पंकज सिंह, जितेंद्र सिंह और गोपालगिरि ने भी अलग-अलग वाद सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दायर कर श्रीकृष्ण जन्म्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह हटाने की मांग की है।

अब तक 10 वाद दायर हो चुके हैं

श्रीकृष्ण जन्मस्थान मामले में अब तक अदालत में दस वाद दायर हो चुके हैं। लखनऊ निवासी अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री आदि ने सितंबर 2020 में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में वाद दायर किया था। यहां से तीस सितंबर को वाद ये टिप्पणी कर खारिज कर दिया गया था कि रंजना अग्निहोत्री को वाद दायर करने का अधिकार नहीं है। इसे लेकर रंजना अग्निहोत्री आदि की ओर से जिला जज की अदालत में पहले अपील दाखिल की गई और फिर इसे रिवीजन ने कंवर्ट किया गया।

अलग-अलग दायर किए वाद

इस मामले में एक वाद अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने दायर किया है। जबकि मनीष यादव, अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह, दिनेश कौशिक, पवन शास्त्री, अनिल त्रिपाठी, जितेंद्र सिंह व पंकज सिंह और गोपाल गिरि ने अलग-अलग वाद दायर किए गए हैं। इन सभी ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से शाही मस्जिद ईदगाह हटाने की मांग की है।  

Edited By: Abhishek Saxena