आगरा, जेएनएन। शरद पूर्णिमा। वह दिन जब रात में धवल चांदनी के बीच आसमान से अमृत बरसेगा। यही वह रात है, जिस रात ठाकुर जी ने महारास रचाया था। मोर-मुकुट, कटि-काछनी और हीरे-मोती और जवाहरात के साथ सोलह श्रृंगार कर जब आराध्य बांकेबिहारी मुरली बजाते भक्तों को दर्शन देंगे, तो भक्त भी निहाल हो उठेंगे। साल में एक ही दिन मुरली बजाते बांकेबिहारी के इस विलक्षण पलों का साक्षी बनने को देश-दुनिया से श्रद्धालु शरद पूर्णिमा पर वृंदावन आएंगे।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुबह और शाम दोनों ही सेवाओं में एक-एक घंटे देर तक दर्शन खोले रखने का एलान किया है ताकि अधिक श्रद्धालुओं दर्शन सुलभ हो सकें। मंदिर प्रबंधक मुनीश कुमार शर्मा के अनुसार 30 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर ठा. बांकेबिहारीजी की राजभोग और शयनभोग सेवा के तय समय से एक घंटे देर तक दर्शन होंगे। दोपहर 1 बजे मंदिर के पट बंद होंगे तो रात को साढ़े दस बजे शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद होंगे।

यहां भी चंद्रमा की रोशनी में दर्शन देंगे ठाकुर जी

- ठाकुर राधा सनेह बिहारी मंदिर।

- राधा दामोदर मंदिर।-राधारमण मंदिर।

-राधाश्याम सुंदर मंदिर।

- गोविंद देव मंदिर।

- गोपीनाथ मंदिर।

- मदन मोहन मंदिर।

- आश्रम गोदाबिहार मंदिर।

सफेद पोशाक व आभूषणों से सजेंगे गिरिराज जी

शरद पूर्णिमा पर आसमान से बिखरी चांदनी में गिरिराजजी की शिलाएं तेजोमय नजर आएंगी। गिरिराज का सफेद पोशाक व आभूषणों से श्रृंगार किया जाएगा। शरद पूर्णिमा पर तिरछी चितवन से मुस्कराते प्रभु का विशेष श्रृंगार होगा। खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। सुबह की बेला में प्रभु का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। शाम को पुष्प और रजत आभूषणों से श्रृंगार होगा। प्रभु के बालभोग में माखन मिश्री, मीठा दूध का भोग लगेगा। मुकुट मुखारबिंद के सेवायत लक्ष्मीकांत मौज ने बताया कि 31 अक्टूबर शनिवार को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी।

चंद्रमा की किरणों में रखी खीर बन जाती औषधि

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है, यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात वंशीवट पर गोपियों संग महारास किया था। शरद की रात जब ठाकुरजी को चंद्रमा की रोशनी में विराजमान कराया जाता है, तो उन्हें खीर का भोग अर्पित करते हैं। ये खीर जब चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है, तो औषधि बन जाती है। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी बताते हैं वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार दूध में में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व पूर्ण चंद्रमा किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है। यही कारण है ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है। शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में बनाना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। हल्दी का उपयोग निषिद्ध है। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की रोशनी का स्नान करना चाहिए। आयुर्वेद चिकित्सक डा. हरिश्चंद्र वार्ष्णेय का कहना है कि शरद पूर्णिमा के चांद की चांदनी में औषधीय तत्वों का समावेश होता है। इससे नेत्र ज्योति बढ़ने के साथ शरीर के कई रोगों से मुक्ति मिलती है। इस धवल चांदनी में चंद्रमा को एक टक निहारने से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान में 31, द्वारिकाधीश में 30 को मनेगी शरद पूर्णिमा

श्रीकृष्ण जन्मस्थान और प्राचीन केशव देव मंदिर में 31 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी जबकि द्वारिकाधीश महाराज मंदिर में 30 अक्टूबर को मनाई जाएगी। ठाकुर जी का श्रृंगार कर उन्हें खीर का भोग लगाया जाएगा। दो दिन मनेगी शरद पूर्णिमा इस वर्ष अश्विनी पूर्णिमा दो दिन है। शुक्रवार शाम 17.45 बजे से पूर्णिमा लगेगी और शनिवार रात 20.18 बजे तक रहेगी। शुक्रवार कोजागिरी पूर्णिमा व शनिवार को स्नान दान व्रत सत्यनारायण भगवान की पूर्णिमा रहेगी।

शुक्रवार की मध्यरात्रि में निशिथ बेला में स्वच्छतापूर्वक लक्ष्मी महारानी की विधि विधान पूर्वक षोडशोपचार से आराधना की जाती है।

कामेश्वर चतुर्वेदी, निदेशक, दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान।

 

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