आगरा, गौरव भारद्वाज। जहां चाह है वहां राह है। कुछ इसी फलसफे पर एक पहल संस्था ने नई पहल की है। बच्चों को शिक्षित करने को स्कूल तो हैं, लेकिन इसके बाद भी बड़ी तादाद में बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में संस्था ने अब स्कूल को बच्चों तक ले जाने का काम शुरू किया है। इस स्कूल को नाम दिया है ‘स्कूल ऑन व्हील्स’।

एक पहल संस्था द्वारा शिक्षा का उजियारा फैलाया जा रहा है। संस्था द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए एक पहल पाठशाला का संचालन दयालबाग में किया जा रहा है। संस्था के मनीष राय ने बताया कि उन्होंने दयालबाग और करबला के पास पहले से पाठशाला संचालित है। उन्होंने देखा कि बहुत से बच्चे अब भी शिक्षा से दूर हैं। ऐसे में उन्होंने इन बच्चों को स्कूल ले जाने के प्रयास किए। मगर, सबकी अलग-अलग समस्याएं थीं, जिस कारण वह स्कूल नहीं जा सकते थे। ऐसे में उन्होंने सोचा कि अगर बच्चे स्कूल नहीं आ सकते तो क्यों न स्कूल को बच्चों तक पहुंचाया जाए।

ई-रिक्शा बन गया स्कूल

करीब एक माह पहले उन्होंने ‘स्कूल ऑन व्हील्स’ के बारे में सोचा। अपने मिलने वालों से इस बारे में बात की। एक मिलने वाले ने इसके लिए ई-रिक्शा देने की बात कही। ई-रिक्शा मिलते ही उन्होंने इसे मोबाइल पाठशाला में तब्दील कर दिया। ई-रिक्शा पर ही ब्लैकबोर्ड, दरी, कॉपी-किताबें और बच्चों के खाने-पीने के लिए कुछ सामान रखा। इसके बाद कूड़ा बीनने वाले, चाय या ठेले पर काम करने वाले बच्चों से बात की। सबको एक समय पर एकत्रित होने के लिए तैयार किया और अपनी पुरानी पाठशाला के स्कूल के टीचर के साथ बच्चों को पढ़ाने पहुंच गए। शाम को एक घंटा वह और उनके स्कूल के शिक्षक बच्चों को पढ़ाने जाते हैं।

तीन स्थान हुए तय

मनीष राय ने बताया कि स्कूल ऑन व्हील्स में अभी 125 बच्चे रजिस्टर्ड हैं। इसके तीन स्थानों सुल्तान गंज की पुलिया, खंदारी और सुभाष बाजार में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। सुल्तानगंज में शाम पांच बजे, खंदारी में छह बजे और सुभाष बाजार में तीन बजे क्लास लगती है। उनका प्रयास है कि पूरे शहर में 15 जगह पर बच्चों को पढ़ाया जाए। इसके लिए उन्होंने कई ऑटो चालकों से बात की है। जल्दी अन्य स्थानों पर भी पढ़ाई शुरू करा दी जाएगी। इस काम में कॉलेजों के छात्र-छात्रएं भी सहयोग कर रहे हैं।

2009 में हुई थी संस्था की शुरुआत

एक पहल संस्था की शुरुआत आरईआइ कॉलेज के शिक्षक मनीष राय ने अपने पिता की स्मृति में अपने छात्रों के साथ मिलकर की थी। दयालबाग स्थित एक पहल पाठशाला में करीब 500 बच्चे हैं। आठवीं के बाद बच्चों का दूसरे स्कूल में नौंवी में दाखिला कराया है।

करनी पड़ी काउंसिलिंग

दुकानों पर काम करने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए दुकानदारों की काउंसिलिंग करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि बहुत से दुकानदारों का कहना था कि पढ़ने-लिखने के बाद बच्चा काम नहीं करेगा। तब उन्हें समझाया कि पढ़ने के बाद वह आपकी ज्यादा मदद कर सकेगा। इसके बाद दोपहर में आधा घंटा समय दिया।

 

Posted By: Tanu Gupta

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