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ट्रकों की ओवरलोडिंग, जुर्माना देकर भी नहीं जा सकेंगे आगे; आगरा के अधिवक्ता ने उठाया मुद्दा

By Ali Abbas Edited By: Prateek Gupta
Published: Sat, 03 Oct 2026 12:35 PM (IST)

अधिवक्ता केसी जैन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ओवरलोड वाहनों पर सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि अतिरिक्त भार उतरवाने का ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने ओवरलोड वाहनों से अतिरिक्त भार उतरवाने का आदेश दिया।

  2. अधिवक्ता केसी जैन ने सड़क सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी।

जागरण संवाददाता, आगरा। ओवरलोडिंग के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के मुद्दे पर अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने सुप्रीम कोर्ट में एक अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने आवेदन पर बहस की और कोर्ट के समक्ष अपने सुझाव रखे।

जैन ने स्पष्ट किया कि केवल दंड या अतिरिक्त शुल्क वसूल करके ओवरलोड वाहनों को आगे जाने देना सड़क सुरक्षा के उद्देश्य को पूरा नहीं करता। उन्होंने विशेष रूप से आग्रह किया कि ओवरलोड वाहनों को रोका जाए, अतिरिक्त भार उतरवाया जाए, और वाहन का पुनः भार मापा जाए।

जैन ने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई ओवरलोडिंग संबंधी मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके साथ ही, भार मापन, इलेक्ट्रानिक प्रवर्तन और अतिरिक्त भार उतारने की प्रक्रिया का नियमित अभिलेख रखा जाए। 28 सितंबर 2026 को इस आवेदन पर सुनवाई हुई, जिसमें जैन द्वारा प्रस्तुत तर्कों और सुझावों पर न्यायालय ने विचार किया।

सुप्रीम कोर्ट ने ओवरलोड वाहनों के संबंध में भार मापन व्यवस्था को प्रभावी बनाने, इलेक्ट्राॅनिक प्रवर्तन को मजबूत करने, राज्यों द्वारा पुलिस सहायता उपलब्ध कराने और ओवरलोड वाहनों की पहचान, दंड और अतिरिक्त भार हटाए जाने से संबंधित आंकड़े नियमित रूप से रखने के निर्देश दिए। जैन द्वारा उठाया गया मूल मुद्दा, केवल दंड वसूलना नहीं, बल्कि अतिरिक्त भार वास्तव में उतरवाना, अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हिस्सा बन गया है।

उन्होंने कहा कि यदि ओवरलोडिंग वाहन की ब्रेकिंग, संतुलन, टायर, स्टीयरिंग और सड़क पर नियंत्रण को प्रभावित करती है, तो केवल आर्थिक दंड लगाने से वह वाहन सुरक्षित नहीं हो जाता। दंड देने से अपराध का आर्थिक परिणाम हो सकता है, लेकिन अतिरिक्त भार हटाने से ही सड़क पर मौजूद वास्तविक खतरा समाप्त होता है।

जैन ने अपने आवेदन में वर्ष 2005 के 'परमजीत भसीन बनाम भारत संघ' निर्णय का उल्लेख किया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि अपराध के शमन या जुर्माना जमा करने के बाद भी अतिरिक्त भार को वाहन में बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अब, 21 वर्ष बाद, उसी कानूनी सिद्धांत को प्रभावी प्रवर्तन के साथ जोड़ते हुए यह विषय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया है। इस प्रकार, ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सहायक होगा।

एनएचएआई की मानक कार्यप्रणाली हो पूरे देश में लागू

न्यायालय के समक्ष भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई मानक कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया। इसमें ओवरलोड वाहनों की पहचान, भार की पुष्टि, वाहन को रोकना, अतिरिक्त भार उतरवाना और उसके बाद पुनः भार मापने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

केरल उच्च न्यायालय ने इस मानक कार्यप्रणाली को अपने आदेश का हिस्सा बनाया और उसके कठोर तथा निरंतर क्रियान्वयन पर जोर दिया। इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत यही हैः

तीन वर्ष में 28.80 लाख ओवरलोड वाहन पकड़े गए

केसी जैन के आवेदन में सूचना के अधिकार के माध्यम से प्राप्त जानकारी का भी उल्लेख किया गया है। 27 टोल प्लाजा से प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन वर्षों में 28.80 लाख ओवरलोड वाहनों का पता लगाया गया। लेकिन उपलब्ध रिकार्ड में अनिवार्य रूप से अतिरिक्त भार उतरवाए जाने का एक भी मामला दर्ज नहीं था। यही वह अंतर है जिसे अब भरना आवश्यक है।