आगरा, जागरण संवाददाता। सावन मास शिव का प्रिय मास है और इस मास की शिवरात्रि के दिन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस साल सावन शिवरात्रि 19 जुलाई रविवार को है। ज्‍योतिषाचार्य डॉ शोनू मेहरोत्रा के अनुसार भगवान शिव की उपासना का मास सावन शुरू हो चुका है। सावन महीने में सभी भक्त शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा करते हैं। सावन के सोमवार वैसे भी भोलेनाथ को प्रिय हैं तो ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए इस महीने का महत्व बढ़ जाता है। शिव पूजा से पुण्यों में बढ़ोतरी तो होती ही है लेकिन शास्त्र के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों को करने की मनाही भी है। ऐसे कार्यों को करने से पूजा का प्रभाव निष्फल हो जाता है।

न करें ये भूलकर भी काम

किसी का अपमान न करें

वैसे तो हमें किसी का अपमान कभी नहीं करना चाहिए। लेकिन सावन में किसी बुजुर्ग, अपने से बड़े, गुरुजनों, भाई-बहन, दोस्त, जीवन साथी या किसी निर्धन व्यक्ति का अपमान भूलकर भी नहीं करना चाहिए। सदैव इनको सम्मान दें।

बुरे विचार मन में न लाएं

मन में किसी के लिए भी दुर्भावना और बुरे विचार त्याग दें। दुर्भावना के कारण पूजा के समय आपका मन इधर-उधर भटकता रहेगा जिससे पूजा फलदायी नहीं होगी।

क्रोध करने से रहें दूर

क्रोध करना तो वैसे भी नुकसानदायक होता है। क्रोध में लिए गए फैसले अक्सर हमें हानि पहुंचाते हैं। जब क्रोध आता है तो मन की एकाग्रता और विवेक क्षीण हो जाता है। ऐसे में मन अशांत होने से की गई पूजा निष्प्रयोज्य हो जाती है। लिहाजा यह व्यर्थ हो जाती है।

घर में झगड़ा न करें

कहते हैं कि जिन घरों में क्लेश होता है, अशांति बनी रहती है वहां देवी-देवताओं का निवास नहीं होता है। झगड़ा करने से पूरे घर की शांति भंग हो जाती है। सावन में विशेष ध्यान रखें कि घर में या पति-पत्नी में विवाद न हो। एक-दूसरे की गलतियों को क्षमा करें। मन प्रसन्न रहेगा तो ध्यान भी पूजा में लगेगा और आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

क्‍या है इस दिन का महत्‍व

डॉ शोनू के अनुसार सावन में हर रोज शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए। भगवान शिव जी की पूजा में जल और गाय के दूध को अर्पित करना शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में सावन का महीना बहुत ही पवित्र माना गया है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस पूरे महीने शिवभक्त बड़ी ही श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। सावन माह में पड़ने वाली शिवरात्रि अपना विशेष महत्व रखती है। मालूम हो कि प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि भी पड़ती है। लेकिन सावन माह में आने वाली शिवरात्रि का खास महत्व है। सावन की शिवरात्रि को फाल्गुन महीने में आने वाली महाशिवरात्रि के समान ही फलदायी माना गया है। इस बार श्रावण मास की शुरूआत 6 जुलाई से हुई है और इसका समापन 3 अगस्त को होगा। बता दें कि इस बार सावन की शुरुआत और समाप्ति दोनों ही सोमवार को होगी। इस बार कुल पांच सावन सोमवार का दिन रहेगा। जो बहुत ही शुभ माना जाता है।

पौराणिक कथा

मान्यता के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन चल रहा था तब समुद्र से विष का घड़ा निकला। लेकिन इस विष के घड़े को न ही देवता और न ही असुर लेने को तैयार हो रहे थे। तब विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए और समस्त लोकों की रक्षा करते हुए भगवान शंकर ने इस विष का पान किया था। विष के प्रभाव से भगवान शिव का ताप बढ़ता जा रहा था तब सभी देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शंकर पर जल चढ़ाना शुरू कर दिया था। तभी से सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है। 

Edited By: Tanu Gupta