आगरा, तनु गुप्ता। पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष के आखिरी दिन सर्व पितृ अमावस्या मनाई जाती है। जो इस बार 25 सितंबर रविवार को है। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है। सर्व पितृ अमावस्या जिसे विसर्जनी या महालया अमावस्या भी कहा जाता है। आधुनिक एस्ट्रो एवं वास्तु विशेषज्ञ दीप्ति जैन के अनुसार 16 दिन से धरती पर आए हुए पितर इस अमावस्या के दिन अपने पितृ लोक में पुनः चले जाते हैं। इस दिन पितरों के निमित्त् ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है एवं दान- दक्षिणा के साथ उन्हें संतुष्ट कर विदा किया जाता है।

आम तौर पर ज्योतिष अनुसार अमावस्या के दिन सूर्य व चंद्रमा एक ही घर में होते हैं। इस दिन चंद्रमा की दृश्यता एकदम शून्य होती है। चंद्रमा मन का कारक होता है। जिस जातक की कुंडली में चंद्रमा दुर्बल स्थिति में हो या छठे आठवें या बारहवें भाव में विराजमान हो या राहु, केतु और शनि जैसे पापी ग्रहों से युति कर रहा हो, तो ऐसा व्यक्ति मन से दुर्बल होता है। अमावस्या के दिन उसका मन बेचैन व अस्थिर होना है। ऐसे में यदि वह व्यक्ति निम्नलिखित उपचार करें तो वह अपनी मानसिक स्थिरता बनाये रख सकता है। ये उपचार पितृ अमावस्या सहित हर मासिक अमावस्या काे किये जा सकते हैं।

1.अपने पितृरों के नाम से किसी वृद्ध आश्रम में शुद्ध भोजन दान करें। राहु ग्रह के दुष्प्रभाव से आपको मुक्ति मिलेगी।

2.गाय को भोजन करवाएं। कहते हैं गाय में सभी देवी देवताओं का वास होता है। जिस घर में नियमित गौग्रास निकाला जाता है, वहां लोग स्वस्थ व संतुलित होते हैं।

3.मछली के तालाब में मीठी आटे की गोली डाले व चीटियों के बिल में पंजीरी डालें। केतु के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलेगी। मन का विचलन दूर होगा।

4.शिवलिंग पर श्वेत पुष्प अर्पण कर जलाभिषेक करें। चांदी के नाग नागिन का जोड़ा शिव लिंग पर चढ़ाये। कालसर्प दोष का असर निम्न होगा।

5.घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं। घर के ब्रह्मस्थान व सभी दिशाओं में गूगल की धूप दिखाएं। नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी।

6.किसी गरीब परिवार या घर के सेवक की सहायता करें। शनि ग्रह के दुष्प्रभाव से मुक्त होकर आप विषम परिस्थितियों से अपना बचाव कर पाएंगे।

7.किसी सार्वजनिक स्थान पर अपने घर के सदस्यों की गिनती अनुसार पीपल का पेड़ लगाएं। साथ ही वहां शुद्ध घी का दीपक जलाएं। सामूहिक भाग्य के कारण आ रही समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। 

दीप्ति जैन, आधुनिक वास्तु एवं एस्ट्रो विशेषज्ञ

Edited By: Tanu Gupta