आगरा, जागरण संवाददाता। दीपावली पर इस बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स या एक्यूआइ) से आतिशबाजी की बिक्री तय हो सकी। एक्यूआइ 400 से कम रहने पर ही ग्रीन पटाखों की बिक्री व चलाने के निर्देश थे। आगरा समेत 27 शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक मध्यम श्रेणी का पाए जाने पर ग्रीन पटाखों की बिक्री व चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने आतिशबाजी को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे, जिसके बाद से ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की बात सामने आई। प्रशासन ने 169 प्रकार के विभिन्न ग्रीन पटाखों को सूचीबद्ध किया है। इसकी सूची विक्रेताओं को दी जाएगी। विक्रेता सूचीबद्ध ग्रीन पटाखे ही बेच सकेंगे। वहीं, 125 डेसीबल से अधिक ध्वनि प्रदूषण वाले पटाखों की बिक्री पर पहले से ही प्रतिबंध है।

आतिशबाजी की बिक्री को लेकर पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेसो) द्वारा जारी दिशा-निर्देश

विक्रेताओं के लिए

-क्लोरेट युक्त अातिशबाजी जैसे कि रंगीन तारा बत्तियां एवं रोल व डाट कैप्स को दुकान में न रखें।

-केवल अधिकृत आतिशबाजी खरीदें व बेचें जिन पर निर्माता का नाम एवं आतिशबाजी को चलाने से संबंधित विस्तृत जानकारी हो।

-विक्रय हेतु भंडार की गई किसी भी आतिशबाजी में लिथियम, एंटीमनी, मरकरी, आर्सेनिक, लेड एवं स्ट्रोंसियम क्रोमेट के यौगिक पदार्थ नहीं होने चाहिए।

-आतिशबाजी जिसमें एक दूसरे से जुड़े हुए आतिशबाजी की लड़ी भी सम्मिलित है एवं जिनका ध्वनि का स्तर चार मीटर की दूरी से जलाने में 125 डेसीबल (ए1) या 145 डेसीबल (सी) पीके से अधिक है। उनके निर्माण, विक्रय एवं उपयोग पर पाबंदी लगा दी है।

ग्राहकों के लिए

-केवल विश्वसनीय व लाइसेंसधारक विक्रेता से आतिशबाजी खरीदें।

-आतिशबाजी को सुलगाने के लिए मोमबत्ती या अगरबत्ती का प्रयाेग किया जाए।

-वयस्क व्यक्ति के निर्देशन में ही आतिशबाजी का प्रयोग करें।

-हाथ में पकड़कर पटाखे न सुलगाएं, पहले नीचे रखें फिर उन्हें सुलगाएं और हट जाएं।

-किसी भी ऐसे स्थान पर हवाई आतिशबाजी न छुटाएं, जहां ऊपर आसमान में जाने के लिए रुकावट हो, जैसे पेड़, पत्ते, तार आदि। खुली इमारत के पास कभी भी आतिशबाजी न सुलगाएं। यह किसी भी घर में अाग लगने का कारण बन सकती है।

इसे कहते हैं ग्रीन पटाखा

ग्रीन पटाखों से कम प्रदूषण होता है। आम पटाखों की तुलना में इनके शेल का आकार भी कम होता है। ग्रीन पटाखों काे इस तरह से बनाया जाता है कि जलाए जाने पर ये धूल में ज्यादा कण नहीं उड़ाते। इनके निर्माण में लिथियम, बैरियम, आर्सेनियम व लेड जैसे हानिकारक रसायन नहीं होते। ये पटाखे जलने पर भाप छोड़ते हैं, जिनसे धूल नहीं उड़ती। ग्रीन पटाखे आम पटाखों की तुलना में 30 फीसद कम कण उत्सर्जित करते हैं।

सीएसआइआर व नीरी देती है लाइसेंस

ग्रीन पटाखों का प्रमाणन केंद्र सरकार की एजेंसी सीएसआइआर व नीरी द्वारा किया जाता है। इसमें पटाखों के डिब्बों पर नीरी का हरे रंग का लोगो और क्यूआर कोड होता है। जिसे स्कैन करने पर ग्रीन पटाखों की पहचान की जा सकती है। पटाखों को बनाने के लिए पेट्रोलियम और एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गनाइजेशन (पीईएसओ) से लाइसेंस लेना होता है।

तीन दिन का वायु गुणवत्ता सूचकांक

29 अक्टूबर: 308 एक्यूआइ बहुत खराब स्थिति

30 अक्टूबर: 252 एक्यूआइ खराब स्थिति

31 अक्टूबर: 258 एक्यूआइ खराब स्थिति

निगरानी को बनाईं समिति

संयुक्त मुख्य विस्फोटक नियंत्रक मध्यांचल डॉ. एपी सिंह ने बताया कि ग्रीन पटाखों की बिक्री को लेकर सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दीपावली पर ग्रीन्र पटाखाें का उपयोग सुनिश्चित करने को निगरानी के लिए समिति बनाई गई है।

Edited By: Nirlosh Kumar