आगरा, जेएनएन। आम जनता के हित में सरकार योजनाएं ला रही है लेकिन जिनको उनका पालन करना है, वे ही पलीता लगाने में लगे हैं। गरीबों को इलाज सुलभ कराने की आयुष्मान योजना को भी फर्जीवाड़े का कैंसर लगा दिया गया। मैनपुरी जिले में पहले आयुष्मान मित्रों के चयन में अनियमितता बरती गई, उसके बाद लाभार्थियों के हक पर डाका डालने का काम हुआ। 70 फीसद लाभार्थियों तक प्रधानमंत्री द्वारा भेजी गई चि_ी पहुंचाई ही नहीं गई। ऐसे में जानकारी के अभाव में लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा उपचार कराना पड़ रहा है। संयुक्त निदेशक ने जमीनी स्तर पर पड़ताल कर लाभार्थियों से पूछताछ की तो पूरा खेल खुल गया। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा बरती गई इस लापरवाही की तैयार फाइल अब 13 जून को मुख्यमंत्री के समक्ष पेश की जाएगी।

संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ डॉ. रंजना शर्मा ने मंगलवार को जिला महिला चिकित्सालय में पहुंचकर आयुष्मान भारत योजना की पड़ताल की। एक-एक कर मरीजों से योजना के बारे में पूछा तो सभी मरीज पूरी तरह अनजान मिले। जानकारी करने पर पता चला कि योजना की शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मैनपुरी के लाभार्थियों के नाम से एक लाख से ज्यादा पत्र सीएमओ कार्यालय को भेजे गए थे। इन्हें आशाओं के माध्यम से लाभार्थियों के घर तक पहुंचाया जाना था। मात्र 30 फीसद पत्रों का ही वितरण कराया गया, जबकि 70 फीसद पत्र गायब हो गए। जिनका कोई पता नहीं है।

फाइलें खंगालीं तो आयुष्मान मित्रों के चयन में भी गड़बड़ी मिली। इनके चयन के लिए सीसीसी सर्टिफिकेट के साथ छह माह का अनुभव भी मांगा गया था लेकिन अनुभव प्रमाण पत्र नहीं मिला है। मनमाने ढंग से आयुष्मान मित्रों का चयन किया गया है। जेडी का कहना है कि 13 जून को मुख्यमंत्री की समीक्षा होनी है। इस समीक्षा बैठक में निरीक्षण की रिपोर्ट पेश की जाएगी।

आयुष्मान मित्र की जाएगी नौकरी

जिला महिला अस्पताल में 31 मार्च को ज्वाइन करने के बाद से आज तक आयुष्मान मित्र ने कोई काम किया ही नहीं। जांच में लापरवाही बरतने वाले आयुष्मान मित्र की सेवा समाप्त करने के संकेत देते हुए जेडी ने उसके स्थान पर दूसरे मित्र की तैनाती के निर्देश सीएमएस को दिए हैं।

अस्पताल के पास लाभार्थियों की सूची ही नहीं

सीएमओ कार्यालय में आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी यूनिट का संचालन किया जा रहा है। लेकिन, आज तक योजना के तहत चिन्हित अस्पतालों के पास लाभार्थियों की सूची भेजी ही नहीं गई। सीएमएस डॉ. एके पचौरी का कहना है कि उनके पास सीएमओ कार्यालय द्वारा जिले के किसी भी लाभार्थी की कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में जानकारी के अभाव में लाभार्थियों की पहचान करना बेहद मुश्किल है। जेडी ने चौबीस घंटे के अंदर सूची उपलब्ध कराने को कहा है।

'आयुष्मान भारत योजना में बड़े स्तर पर लापरवाही बरती गई है। न तो लाभार्थियों तक पत्र पहुंचाए गए हैं और न ही उन्हें उपचार मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की भी इस गड़बड़ी में संलिप्तता नजर आ रही है। हर स्तर पर लापरवाही हुई है। खासकर महिला अस्पताल में तो इस योजना के तहत एक भी सीजर नहीं हुआ। यह ङ्क्षचता की बात है। 13 जून को मुख्यमंत्री की समीक्षा में इस पूरी रिपोर्ट को रखा जाएगा। निश्चित कार्रवाई होगी'।

डॉ. रंजना शर्मा, संयुक्त निदेशक, लखनऊ

नोडल अधिकारी मैनपुरी आयुष्मान भारत योजना।

 

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Posted By: Prateek Gupta

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