आगरा, जागरण संवाददाता। जिले के इकलौते धान खरीद केंद्र पर लंबे समय से सन्नाटा पसरा हुआ है। पतला धान लेकर पहुंचने वालों को केंद्र से बैरंग किया जा रहा है, जबकि मोटा धान लेकर पहुंचने वाले किसानों की संख्या अधिक नहीं है। ऐसे में तीन साल से शून्य खरीद का आंकड़ा तो पार हुआ, लेकिन किसानों को भटकना ही पड़ रहा है। शुक्रवार को खरीद का अंतिम दिन है।

आगरा के 15 में से 12 ब्लाक डार्क जोन में आते हैं, जिस कारण कम पानी की खपत वाली फसलें किसान करते हैं। धान की रोपाई से लेकर फसल तैयार होने तक अधिक पानी की जरूरत होती है, इसलिए जिले में सिर्फ पांच हजार हेक्टेयर में धान उत्पादन होता है। किसानों द्वारा बासमती, सुगंधी, 1509 आदि प्रजातियों का उत्पादन किया जाता है। जिले में खुले सरकारी क्रय केंद्र पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से खरीद 15 जनवरी तक होनी है। अभी तक तीन किसानों से 113 कुंतल खरीद हो चुकी है। दर्जनों किसानों ने खरीद केंद्रों से बैरंग करने का आरोप भी लगाया है। अछनेरा के किसान राजेश ने बताया कि तीन हेक्टेयर में धान उत्पादन किया था। बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने पर केंद्र पर बेचने का प्रयास किया गया, लेकिन वापस कर दिया गया। उन्होंने बताया कि हमारा धान सरकारी मानकों से बेहतर था, लेकिन पतला होने के कारण ख्ररीद नहीं की गई। रायभा के किसान उमेश ने बताया कि दो हेक्टेयर में परिवार के उपयोग के लिए धान उत्पादन करते हैं। बचा हुआ बाजार में बेच देते हैं। इस बार बाजार में शुरूआत में भाव 1500 रुपये कुंतल था, जिस कारण क्रय केंद्र पर 1868 रुपये प्रति कुंतल पर बेचने का प्रयास किया। मानकों के अनुरूप नहीं होने की बात कह बैरंग कर दिया गया। जिला खाद विपणन अधिकारी अजय विक्रम ने बताया कि निर्धारित मानकों के अनुसार अभी तक 113 कुंतल खरीद हुई है। 

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