आगरा, जागरण संवाददाता। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में उद्योगों की स्थापना व विस्तार पर रोक को मंगलवार को चार वर्ष पूरे हो जाएंगे। यहां व्हाइट कैटेगरी को छोड़कर अन्य किसी तरह के उद्योग अनुमन्य नहीं हैं। नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स और आगरा डवलपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ईमेल कर स्थिति के समाधान को हस्तक्षेप करने की मांग की है, जिससे कि उद्यमियों व श्रम शक्ति में व्याप्त निराशा दूर हो सके।

एडीएफ के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों (व्हाइट कैटेगरी को छोड़कर) की स्थापना व विस्तार पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अाठ सितंबर, 2016 को रोक लगा दी थी। यह रोक बिना किसी कार्यालय आदेश या पर्यावरण संरक्षण नियमावली की निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए बगैर लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर, 2019 को गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को अनुमति प्रदान की, लेकिन फिर भी स्थिति अस्पष्ट है। एडीएफ के सचिव केसी जैन ने कहा कि आगरा में यदि होटल, अस्पताल, शीतगृह, जूता इकाइयां और हाउसिंग प्रोजेक्ट नहीं होंगे, तो शहर कहां जाएगा? केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गैर-औद्योगिक गतिविधियों का वर्गीकरण 30 अप्रैल को कर दिया था, उसके अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। आत्मनिर्भर भारत बनाने को अनावश्यक बंदिशें समाप्त की जाएं, तभी हम लोकल से ग्लोबल बन सकेंगे।

रोक की वजह से हो रहा उद्यमियों व युवाओं का पलायन

नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के जीवनी मंडी स्थित कार्यालय में सोमवार को उद्योगों पर रोक के चार वर्ष होने पर बैठक की गई। अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा कि चैंबर के प्रयासों के फलस्वरूप व्हाइट कैटेगरी में उप्र सरकार ने कुछ नए उद्योगों को जोड़कर राहत प्रदान की है। पर्यावरणीय सुरक्षा एवं प्रदूषण नियंत्रण प्रकोष्ठ के चेयरमैन नरेंद्र तनेजा ने कहा कि रोक के चलते टीटीजेड से उद्यमियों और युवा शक्ति का पलायन होना दु:खद हैै। उपाध्यक्ष राजेंद्र गर्ग ने उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्शन प्लान को लागू करने, उपाध्यक्ष योगेश जिंदल ने गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों से रोक हटाने और कोषाध्यक्ष मयंक मित्तल ने गैर-औद्योगिक गतिविधियों को अनुमति देने की मांग की।

यह हैं प्रमुख मांगें

-आइआइटी, कानपुर की ताजमहल पर किए गए अध्ययन की रिपोर्ट को लागू किया जाए। इसमें सड़कों, वाहनों व यातायात प्रबंधन को वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बताया गया है।

-चार वर्षों से गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों पर लगी रोक समाप्त हो।

-होटल, अस्पताल, एयरपोर्ट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट व निर्माण परियोजनाओं को उद्योगों के समान नहीं माना जाए।

-हर मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाकर स्वीकृत कराई जाए।

-नीरी के टीटीजेड इनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान के अनुसार टीटीजेड अथॉरिटी को सशक्त बनाया जाए। प्रदेश के मुख्य सचिव व केंद्र कै कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में यह प्राधिकरण हो।

-टीटीजेड में करीब तीन फीसद वनावरण है, जिसे बढ़ाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एग्राेफॉरेस्ट्री को बढ़ावा दिया जाए।

फैक्ट

-10400 वर्ग किमी में विस्तृत है टीटीजेड।

-आगरा, मथुरा, फीरोजाबाद, एटा, हाथरस व भरतपुर हैं शामिल।

-टीटीजेड में देश की एक फीसद जनसंख्या रहती है।

-यहां आठ सितंबर, 2016 की रोक के बाद होटल, जूता फैक्ट्री, कोल्ड स्टोरेज लगाने की अनुमति नहीं है।

-प्रधानमंत्री आवास योजना में आवासीय भवन अनुमति के अभाव में नहीं बन पा रहे हैं। 

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