आगरा, जागरण संवाददाता। एसएन में नवजात और गंभीर मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इन्हें दिल्ली, जयपुर और लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। रास्ते में ही मरीजों की सांसें टूट रही हैं।

19 अप्रैल को उतरारा, (शिकोहाबाद) निवासी संजीव यादव नवजात बेटे को एंबुलेंस से सैफई, पीजीआइ लेकर जा रहे थे। रास्ते में एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने पर नवजात की मौत हो गई। निजी अस्पताल के साथ ही एसएन, लेडी लॉयल महिला चिकित्सालय में प्रसव के बाद नवजातों की हालत नाजुक होने पर एसएन के बाल रोग विभाग में अत्याधुनिक इलाज की सुविधा नहीं है। यहां चार वेंटीलेटर हैं, ये फुल रहते हैं। 10 डॉक्टर थे, इसमें से चार के तबादले हो गए हैं। ऐसे में मरीजों को दिल्ली, लखनऊ और जयपुर रेफर कर दिया जाता है। एंबुलेंस से मरीज ले जाते समय उनकी मौत हो रही हैं।

वेंटीलेटर नहीं मिला, दिल्ली कर दिया रेफर

शहनाज निवासी किरावली के प्रसव के बाद शिशु की तबीयत बिगड़ गई, रविवार दोपहर 12 बजे परिजन उसे लेकर एसएन के बाल रोग विभाग पहुंचे। उसके ऑक्सीजन लगी हुई थी, यहां वेंटीलेटर खाली नहीं था। डॉक्टरों ने नवजात को दिल्ली रेफर कर दिया, एक निजी एंबुलेंस से परिजन उसे लेकर दिल्ली चले गए। इस तरह के केस आए दिन देखने को मिलते हैं। यहां गंभीर मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है।

इमरजेंसी से आइसीयू में शिफ्ट नहीं होते मरीज

एसएन की सात मंजिला बिल्डिंग में सघन चिकित्सा कक्ष (आइसीयू) है। इमरजेंसी में भर्ती गंभीर मरीजों को आइसीयू में रेफर किया जाता है, लेकिन आइसीयू में वेंटीलेटर खाली नहीं मिलते हैं। ऐसे में मरीजों को दिल्ली और जयपुर निजी एंबुलेंस से लेकर जाना पड़ रहा है।

कमाई कर रहे एंबुलेंस चालक

निजी अस्पताल और एसएन से रेफर किए जा रहे मरीजों से एंबुलेंस चालक कमाई कर रहे हैं, इन्हें दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती करा देते हैं। दिल्ली और जयपुर के निजी अस्पतालों से भी एंबुलेंस चालक संपर्क में रहते हैं, रास्ते में ही मरीजों को भ्रमित कर अन्य अस्पताल में भर्ती करा देते हैं।

ये है हाल

बाल रोग विभाग

वेंटीलेटर - 4 (अधिकांश समय फुल रहते हैं)

रेडिएंट वार्मर - 15

डॉक्टर - छह, चार रिक्त पद

आइसीयू

वेंटीलेटर - 18 (अधिकांश समय फुल रहते हैं)

इमरजेंसी स्थित ट्रॉमा सेंटर

बेड - सात

क्‍या कहते हैं जिम्‍मेदार

एसएन में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, सुपर स्पेशलिटी विंग में नवजात शिशु के लिए अलग से वार्ड बनेगा। चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है, जिससे मरीजों को रेफर न करना पड़े।

डॉ. जीके अनेजा, प्राचार्य एसएन मेडिकल कॉलेज

प्रशासन और आरटीओ को साथ लेकर अभियान चलाया जाएगा, एंबुलेंस पर स्वास्थ्य विभाग का सीधा नियंत्रण नहीं है। पूर्व में भी कई बार आरटीओ को पत्र लिखा जा चुका है।

डॉ. मुकेश वत्स, सीएमओ  

Posted By: Prateek Gupta

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