आगरा, यशपाल चौहान। पुलिस महकमे से अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर घर भेजे गए पुलिसकर्मी विभाग पर बोझ थे। कोई ड्यूटी के प्रति लापरवाह था तो कोई आठ वर्ष तक ड्यूटी पर ही नहीं आया। कई पुलिसकर्मियों का करेक्टर रोल गलत आचरण के कारण दंडों से भरा था। जागरण ने इनके कारणों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

आगरा से सेवानिवृत्त किया गया लिपिक विनोद कुमार उपाध्याय वर्ष 1985 में भर्ती हुआ था। उसके करेक्टर रोल में 13 परिनिंदा लेख थे। पांच बार अर्थदंड दिया जा चुका था और वर्ष 2004 में सत्यनिष्ठा रोकी गई। आगरा में ही तैनात कांस्टेबल जगपाल सिंह वर्ष 1989 में भर्ती हुआ। उसे सात बार गलत आचरण के चलते दंड मिला। तीन बार अर्थदंड से दंडित किया गया। पूरे सेवाकाल में वह 3159 दिन (करीब साढ़े आठ वर्ष) ड्यूटी पर नहीं आया। इस तरह ये कांस्टेबल ड्यूटी के प्रति लापरवाह था। वर्ष 2008 में एक वर्ष के लिए वेतनवृद्धि रोकी गई। वर्ष 2004 में एक वर्ष में तीन वेतन वृद्धि तोड़ी गईं। वर्ष 2005 में दो वेतनवृद्धि तीन वर्ष के लिए, वर्ष 2006 में एक वेतनवृद्धि एक वर्ष के लिए रोकी गई और 17 बार लघु दंड से दंडित किया गया। प्रतिकूल वार्षिक मंतव्य के मामले में भी यह सबसे ऊपर था। वर्ष 2005, 07, 09 और 2010 में वार्षिक मंतव्य खराब दर्ज किया गया। आगरा के ही कांस्टेबल मानिकचंद्र वर्ष 1983 में पुलिस में भर्ती हुए। इनको गलत आचरण के चलते 14 बार परनिंदा लेख से दंडित किया और दो बार अर्थदंड से दंडित किया गया। वर्ष 2013 में न्यूनतम वेतन पर एक वर्ष के लिए, वर्ष 2009 में वेतनवृद्धि तीन वर्ष के लिए रोकी गई। 18 बार लघु दंड से दंडित किया गया। इसके साथ ही 2969 दिन यानी आठ वर्ष गैर हाजिर रहा। प्रतिकूल वार्षिक मंतव्य वर्ष 1993 में असंतोषजनक, 1995 में सुधार की आवश्यकता, 2000 में असंतोषजनक और वर्ष 2005 में खराब माना गया। मथुरा में तैनात विशेष श्रेणी के सब इंस्पेक्टर मवासी लाल वर्ष 1979 में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। पूरे सेवाकाल में 10 परिनिंदा लेख मिले। बीते तीन वर्षों में अधिक परिनिंदा लेख और अर्थदंड मिले। इसलिए इन्हें अनिवार्य सेवा निवृत्ति दी गई। मथुरा में ही तैनात कांस्टेबल अहलकर सिंह वर्ष 1979 में भर्ती हुए। उन्हें दस वर्षों में पांच परिनिंदा लेख और अर्थदंड मिल चुके थे। वर्ष 1989 में भर्ती हुए कांस्टेबल राकेश कुमार मथुरा में तैनात थे। उन्हें दस वर्षों में सात परिनिंदा लेख और अर्थदंड दिया गया। आचरण देखते हुए इन्हें भी सेवानिवृत्ति दी गई। फीरोजाबाद से घर भेजे गए कांस्टेबल राजवीर सिंह वर्ष 1982 में पुलिस में भर्ती हुए थे। पूरे सेवाकाल में उन्हें चार परिनिंदा, चार अर्थदंड, तीन न्यूनतम वेतन, पांच बार में कुल 423 दिन अनुपस्थित रहा। एत्माद्दौला थाने में एक मुकदमा भी दर्ज था। फीरोजाबाद के ही कांस्टेबल देवेंद्र पाल सिंह वर्ष 1981 में भर्ती हुआ था। 11 परिनिंदा, छह अर्थदंड मिले, 38 बार में कुल 1720 दिन अनुपस्थित रहा। वर्ष 2017 में वार्षिक गोपनीय मंतव्य खराब होने के कारण इन्हें घर भेज दिया।

फीरोजाबाद में ही तैनात राजपाल सिंह वर्ष 1985 में पुलिस में भर्ती हुआ। पूरे सेवा काल में 4 बार परिनिंदा लेख, तीन बार अर्थदंड मिला। इसके साथ ही 24 बार में कुल 1010 दिन अनुपस्थित रहा। फीरोजाबाद के ही कांस्टेबल देवेंद्र कुमार वर्ष 1979 में भर्ती होने के बाद 37 बार में 2830 दिन अनुपस्थित रहा और 16 परिनिंदा लेख करेक्टर रोल में दर्ज हुआ। मैनपुरी में तैनात कांस्टेबल चंद्रपाल 1982 में भर्ती हुआ। ये 1002 दिन अनुपस्थित रहा और छह बार परिनिंदा लेख करेक्टर रोल में दर्ज हुआ। मैनपुरी के कांस्टेबल राजेंद्र कुमार पूरे सेवा काल में वर्ष 1980 से अब तक 1322 दिन अनुपस्थित रहा। गलत आचरण पर पांच बार परिनिंदा लेख करेक्टर रोल में लिखा गया।  

Posted By: Tanu Gupta

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