आगरा, सुबान खान। माह-ए-रमजान में हर मुसलमान का सिर सजदे में झुकता है और हाथ दुआ को उठते हैं। रोजेदार इबादत करते हैं और अल्लाह अपने बंदों पर 'रहमत' नाजिल फरमाता है। इस पवित्र माह का पहला अशरा ही रहमत का होता है। अल्लाह बंदों के गुनाहों को पस्त कर नेकियां खाते में जोड़ता है।

मौलाना रियासत अली बताते हैं कि रमजान के महीने को तीन अशरों में बांट गया है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरे में अल्लाह अपने बंदों पर दौजक से निजात दिलाता है। उन्होंने बताया कि पहले अशरे में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत नाजिल करता है। हर शख्स की दुआ कबूल करता है। उन्हें रोजे रखने में हिम्मत देता है। जामा मस्जिद के इमाम इरफान उल्ला खान ने बताया कि रमजान और ईद का चांद जरूर देखना चाहिए। क्योंकि चांद देखने के बाद ही रोजा और तरावीह की नमाज शुरू होती है। चांद देखने के बाद तड़के चार बजे लोग सहरी करते हैं। शाम को हर रोजेदार रोजा इफ्तार करता है।

रूह और दिल को पवित्र करता है रोजा

रमजान के महीने में हर मुसलमान अपने मन और शरीर को पवित्र रखता है। वह हर शख्स के साथ विनम्रता का व्यवहार करता है। कोशिश रहती है कि उससे कोई भी गलत कार्य न हो। रोजे में बुरी आदतों पर काबू करके अच्छे विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।

बालिग और आकिल पर फर्ज हैं रोजे

मौलाना रियासत अली के अनुसार रोजा हर उस शख्स पर फर्ज है जो आकिल और बालिग होता है। जो शख्स जान बूझकर रोजा नहीं रखता है वह गुनाहगार होता है। अल्लाह के घर उसे हिसाब देना पड़ेगा।

मस्जिद की आवाज पर बंद करें सहरी

उलेमाओं के अनुसार जिस मस्जिद की आवाज या अपनी घड़ी के हिसाब से सहरी करते हैं, इसी वक्त के हिसाब से इफ्तारी करनी चाहिए। ताकि रोजे का वक्त पूरा हो सके।

खास है तरावीह की नमाज

उलेमाओं के अनुसार रमजान के महीने में सबसे खास तरावीह की नमाज है। पुरुषों को जमात के साथ मस्जिद में नमाज अता करनी चाहिए और महिलाओं को अपने घरों में तरावीह की नमाज का ऐतमाम अकेले में करना चाहिए।

एक नेकी का सवाब 70 गुना

रमजान के महीने की फजीलत है कि जो शख्स एक नेकी करता है अल्लाह उसको 70 नेकियों का सवाब अता फरमाते हैं। इसी तरह जो शख्स एक रुपये की जकात करता है उसे 70 रुपये के बराबर सवाब अता फरमाते हैं। हर शख्स को अपनी जायज कमाई का 2.5 फीसद गरीबों को देना चाहिए। जकात जरूरतमंद लोगों को ही देनी चाहिए।

चांद का दीदार न होने से पहला रोजा मंगलवार को 

मगरिब की नमाज के बाद रविवार को छत पर पहुंची जनता को चांद का दीदार नहीं हो सका। हिलाल कमेटी ने सोमवार को तरावीह और मंगलवार को पहले रोजा का ऐलान कर दिया गया।

रविवार शाम को ढलते ही लोग अपनी छतों पर चढ़ गए। देर शाम तक ब'चे और युवक सभी आसमान की तरफ ताकते रहे, लेेकिन चांद नजर नहीं आया।

जामा मस्जिद पर रूयत-ए-हिलाल कमेटी के सदस्यों को भी चांद नजर नहीं आया। इसके बाद कमेटी ने बैठक की और शहर मुफ्ती मजदुल कुद्दूस खुबैब रूमी ने कहा कि सोमवार को शाबान की 30 तारीख है। इस लिए पहली तरावीह की नमाज सोमवार को होगी। पहला रोजा मंगलवार को है। इस दौरान इस्लामिया लोकल एजेंसी के चेयरमैन हाजी असलम कुरैशी, इमाम इरफान उल्लाह निजमी, अब्दुल मलिक, रमजान अली, हाजी शकील, हाफिज जफर, हाफिज सत्तार, सेठ नईम, हाजी बिलाल, मोहम्मद अमजद कुरैशी, अशरफ कुरैशी, अदनान कुरैशी, अनवर कुरैशी आदि मौजूद रहे।

500 कोस से नहीं मिला चांद का सुबूत

रमजान या ईद का चांद देखने की सूचना 500 कोस की दूरी के दायरे में रहना वाला शख्स देता है, तो भी चांद दिखना मान लिया जाता है। रविवार को कमेटी को 500 कोस के से भी कोई सूचना नहीं प्राप्त हुई है।

ताजमहल में तरावीह आज से

ताजमहल पर तरावीह आज 

रविवार को चांद नजर नहीं आया। अब मंगलवार से रमजान शुरू होगा, लेकिन ताजमहल में तरावीह की शुरुआत सोमवार से हो जाएगी। रमजान के माह में प्रतिदिन रात में ताजमहल इबादत के लिए खुलेगा। इस माह पूर्णिमा पर होने वाला पांच दिवसीय ताज रात्रि दर्शन नहीं होगा।

रमजान के माह में ताजमहल में तरावीह होती है। इसकी शुरुआत सोमवार से हो जाएगी। इसमें स्थानीय निवासी ही इबादत के लिए स्मारक में प्रवेश पा सकेंगे। उन्हें पूर्वी गेट से रात 8:30 से 9:15 बजे के दरम्यान स्मारक में प्रवेश दिया जाएगा। रात 9:30 से 11:30 बजे तक तरावीह होगी। इसमें स्थानीय निवासियों को आइडी देखने के बाद ही ताज में प्रवेश दिया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) द्वारा तरावीह को आने वाले व्यक्तियों का प्रतिदिन रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए स्मारक के गेट पर रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें पूरा ब्योरा दर्ज किया जाएगा। उनकी आइडी भी चेक की जाएंगी।

 

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Posted By: Prateek Gupta