आगरा, जेएनएन। अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के मंदिर की आधारशिला में यमुनाजल, ब्रजरज व कुंडों का जल शामिल होगा। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन की प्रमुख साध्वी ऋतंभरा यमुनाजल व ब्रजरज को वैदिक मंत्रों से अभिमंत्रित करने के बाद इसे लेकर अयोध्या रवाना होंगी। 

केशीघाट पर यमुना पूजन के दौरान रविवार को साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी मनोकामना जब पूरी होती है तो मनुष्य प्रफुल्लित होता है। मन हिलोरे मारने लगता है। ऐसा ही प्रतीत हो रहा है, जबकि जन-जन के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर का भूमिपूजन होने जा रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम के जिस मंदिर के लिए तरुणाई को न्यौछावर कर दिया, मन में केवल एक ही उम्मीद लिए कि कब आराध्य श्रीराम अपने दिव्य और भव्य मंदिर में विराजेंगे। आज संघर्ष के वे पल सफल हुए और मौका आ गया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम अपने निज मंदिर में स्थापित हों। ऐसे दिव्य और भव्य मंदिर के भूमि पूजन के लिए ब्रजरज और यमुनाजल अवध और ब्रज की संस्कृति का संगम करवाएगा। इस मौके पर ब्रज के मंदिर, देवालयों के प्रमुखों ने साध्वी ऋतंभरा को श्रीराम के धनुष-वाण और हनुमानजी का गदा भी समर्पित की। इन सबका साध्वी ऋतंभरा ने वैदिक रीतिरिवाज के साथ पूजन किया। तो केशीघाट का वातावरण जयश्रीराम के नारों से गूंज उठा।

केशीघाट पर यमुना पूजन के बाद साध्वी ऋतंभरा यमुनाजल के कलश का सिर पर रखकर वात्सल्य ग्राम के लिए रवाना हुईं। यहां से साध्वी जल व रज को लेकर सोमवार को अयोध्या के लिए रवाना होंगी। महंत फूलडोल बिहारीदास, स्वामी चित्प्रकाशानंद, महामंडलेश्वर नवल गिरि, आचार्य बद्रीश, रमाकांत गोस्वामी, स्वामी डॉ. आदित्यानंद, रवि भैया, चंद्रलाल शर्मा, आनंदबल्लभ गोस्वामी आदि मौजूद रहे। संचालन आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने किया। 

Posted By: Tanu Gupta

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