आगरा, जागरण संवाददाता। डॉ. भीमराब आंबेडकर विवि की बीएड डिग्री को लेकर मचा घमासान भले कोर्ट के हस्तक्षेप से शांत हो गया, लेकिन वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विवि और प्रयागराज के हिंदी साहित्य सम्मेलन की डिग्रियों को लेकर संशय की स्थिति है। तीन मामले विभाग ने चिन्हित किए हैं, जबकि कई की शिकायतें उठ रही हैं।

मामला तब उठा, जब कस्तूरबा गांधी आवासीय कन्या विद्यालय में आराधना शुक्ला मामला सामने आया। आगरा में भी केजीजीबी की एक संविदा शिक्षिका की डिग्री हिंदी साहित्य सम्मेलन की होने पर संविदा समाप्त कर दी गई, क्योंकि इसे एनसीटीई ने मान्यता नहीं हैं। अब राजपुर चुंगी स्थित नेताजी सुभाष जूनियर हाईस्कूल मधुनगर के एक अन्य शिक्षक नरेंद्र कुमार सिंह की डिग्री भी अमान्य व फर्जी विवि की होने की शिकायत के आधार खंड शिक्षाधिकारी नगर क्षेत्र नीलम सिंह ने उन्हें नोटिस जारी कर साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। उन्होंने बताया कि नरेंद्र सिंह पर आरोप हैं कि उन्होंने कूटरचित दस्तावेजों से अपने पिता द्वारा स्थापित एडेड स्कूल में सांठ-गांठ कर सहायक अध्यापक की नौकरी पाई। लिहाजा उनसे सभी प्रपत्रों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। नहीं आने पर शिकायत सही मानते हुए कार्यवाही कर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।

संपूर्णानंद विवि की डिग्री पर भी सवाल

बीएसए राजीव कुमार यादव ने बताया कि लंबित एसआइटी जांच को लेकर महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विवि की डिग्री से नौकरी पाने वाले शिक्षकों को चिन्हिंत कर जानकारी मांगी थी। जिले के परिषदीय विद्यालयों में ऐसे दो शिक्षक और पांच शिक्षामित्र मिले हैं, जिनकी डिग्री उक्त विवि की है। सभी की जानकारी शासन को भेजी जा चुकी है।

अन्य भी हो सकते हैं मामले

विभाग में चर्चा है कि यह तो सिर्फ वो मामले हैं, जो सामने आ गए। वर्ष 2004 के करीब एडेड स्कूलों में हुए नियुक्तियों में सांठ-गांठ की बड़ी आशंका है, हिंदी विशारद के साथ पूर्व मध्यमा, उच्चतर मध्यमा, शास्त्री व शिक्षा शास्त्री की डिग्रियां संदेह के घेरे में हैं। यदि इन नियुक्तियों की जांच गंभीरता से हो, तो बड़ा मामला सामने आ सकता है। 

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