आगरा: टीबी के खात्मे को एक-एक मरीज पर नजर रखी जानी है। मगर, निजी हॉस्पिटल और क्लीनिक द्वारा टीबी के मरीजों को छिपाया जा रहा है। ये मरीजों का ब्योरा नहीं दे रहे हैं, ऐसे में एक निजी एजेंसी को टीबी के मरीजों का ब्योरा जुटाने का काम सौंपा गया है।

टीबी मुक्त भारत के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसमें प्रत्येक टीबी के मरीज का नोटिफिकेशन (ब्योरा दर्ज कराना) किया जाना है। टीबी के मरीजों के लिए निक्षय पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल में मरीज का ब्योरा दर्ज होने के बाद दवाएं लेने और मरीज की स्थिति की जानकारी दर्ज की जाएगी। सरकारी अस्पतालों में करीब 6500 टीबी इलाज करा रहे हैं। निजी अस्पताल में इससे कहीं ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने निजी चिकित्सकों से इलाज करा रहे टीबी के मरीजों का ब्योरा मांगा था। मगर, उन्हें टीबी के मरीजों की जानकारी नहीं दी जा रही है। सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि सरकारी और निजी अस्पताल में इलाज करा रहे टीबी के प्रत्येक मरीज का ब्योरा दर्ज किया जाना है। इनके द्वारा लिए गए इलाज की जानकारी भी अपडेट की जाएगी। इन मरीजों को हर महीने 500 रुपये दिए जाएंगे। निजी चिकित्सकों द्वारा ब्योरा नहीं दिया जा रहा है, ऐसे में निजी एजेंसी को निजी क्लीनिक से टीबी के मरीजों का ब्योरा जुटाने का काम दिया गया है।

मेडिकल स्टोर संचालकों को भी देनी है जानकारी

निजी क्लीनिक से इलाज करा रहे टीबी के मरीजों द्वारा मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदी जाती हैं। सरकारी अस्पतालों में टीबी की दवाएं निश्शुल्क हैं। ऐसे में मेडिकल स्टोर संचालकों से भी टीबी की दवाएं ले रहे मरीजों का ब्योरा देने के लिए कहा गया है।

Posted By: Jagran