आगरा, जागरण संवाददाता। इन दीवारों के कान नहीं हैं। जम्मू- कश्मीर की जेल से केंद्रीय कारागार में शिफ्ट किए गए बंदी हाई सिक्योरिटी सेल में एक साथ रहने के बावजूद आपस में बातचीत नहीं कर सकेंगे। उन्हें सेल से 10 से 20 मिनट के लिए ही बाहर निकाला जाएगा।

केंद्रीय कारागार में हाई सिक्योरिटी सेल में 30 बंदियों को रखने की ही क्षमता है। जम्मू-कश्मीर से शिफ्ट किए गए बंदियों को जिन सेल में रखा गया है। वहां पर परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा। हाई सिक्योरिटी सेल तक बंदी रक्षक भी अकेले नही जा सकेंगे। वह  किसी अधिकारी की उपस्थिति में ही सेल तक जाएंगे।

हाई सिक्योरिटी सेल के अहाते में एक साथ 15 बंदियों को रखा जा सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से इन बंदियों को सेल से एक साथ बाहर नहीं निकाला जाएगा। कड़ी सुरक्षा के बीच अहाते में घूमने के लिए उन्हें बारी-बारी से निकाला जाएगा। ताकि वह एक दूसरे से रूबरू नहीं हो सकें। प्रत्येक बंदियों को अहाते में एक निश्चित समय के लिए ही टहलने को निकाला जाएगा। उन्हें कब सेल से निकाला और अंदर किया, रोज इसका रिकार्ड रखा जाएगा।

हाई सिक्योरिटी सेल को इस तरह से डिजायन किया गया है कि उनकी दीवारें एक दूसरे से मिली होने के बाद भी बंदियों की आवाज एक दूसरे तक नहीं पहुंच सके।

 

21 साल पहले बनी थी हाई सिक्योरिटी सेल 

केंद्रीय कारागार में हाई सिक्योरिटी सेल 21 साल पहले बनी थी। इसे तीनों केंद्रीय कारागार के तीनों सर्किल से दूर बनाया गया है। जिससे उसमें निरुद्ध बंदी को जेल परिसर में बंदियों की गतिविधियों के बारे में पता नहीं लग सके। 

तारों की बाड़ कराई दुरुस्त

जम्मू कश्मीर से बंदियों को शिफ्ट करने के बाद जेल की चहारदीवारी के बाहर की सुरक्षा व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है। आसपास लगी तारों की बाड़ को सही कराया गया। इसके अलावा चहारदीवारी के बाहर झाडिय़ां उग आई थीं। उन्हें भी साफ कराया गया।

पीएसी गारद को किया अलर्ट

केंद्रीय कारागार के बाहर डेरा डाले पीएसी जवानों को भी अलर्ट कर दिया गया है। पीएसी की गारद बढ़ाई गई है। जवानों को किसी भी संदिग्धों को परिसर के आसपास नहीं फटकने देने के निर्देश हैं।

पहले बैरियर से अब नही आ सकेंगे वाहन

कैलाशपुरी से केंद्रीय कारागार की ओर आने पर पहला बैरियर पड़ता है। यहां पर बंदी रक्षक तैनात रहता है। अब तक स्टाफ के वाहन भी बेरोक-टोक निकलते थे। जम्मू-कश्मीर के बंदियों को शिफ्ट करने के बाद वाहनों को पहले बैरियर पर ही रोक दिया जाएगा। स्टाफ के वाहनों को भी सघन चेकिंग के बाद ही कारागार की ओर आने दिया जाएगा। 

यासीन मलिक भी रखा गया था सेंट्रल जेल में

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख एवं अलगाववादी नेता यासीन मलिक भी 25 साल पहले सेंट्रल जेल में निरुद्ध रह चुका है। उसके छह कश्मीरी साथी भी एक साल से अधिक यहां पर रखे गए थे। सेंट्रल जेल में 25 वर्ष पहले हाई सिक्योरिटी सेल नहीं थीं। नौवें दशक के मध्य में यासीन मलिक को उसके साथियों समेत कड़ी सुरक्षा के बीच सेंट्रल जेल में रखा गया था। उन्हें अलग बैरक में रखा गया था। यहां एक साल से अधिक निरुद्ध रहा था। यासीन मलिक कश्मीर में प्रमुख अलगाववादी नेता है। वह जेकेएलएफ से वर्ष 1988 में जुड़ा था। पाकिस्तान सशस्त्र प्रशिक्षण के लिए गया था। वहां से लौटने के बाद जेकेएलफ का प्रमुख बन गया। उस पर वर्ष 1990 में भारतीय वायुसेना पर आतंकी हमले में भी शामिल होने का आरोप है। पुलवामा हमले के बाद उसके संगठन जेकेएलएफ को सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया। वर्तमान में वह तिहाड़ जेल में निरुद्ध है।

दस साल पहले भी सेंट्रल जेल में निरुद्ध रहे हैं आतंकी केंद्रीय कारागार में दस साल पहले भी आधा दर्जन आतंकियों को रखा गया था। वह कई साल तक यहां निरुद्ध रहे थे। उस समय आतंकियों ने रिहाई की मांग को लेकर जेल में भूख हड़ताल भी की थी। आतंकियों की सुरक्षा के लिए जेल प्रशासन को विशेष इंतजाम करने पड़े थे। जिला प्रशासन और पुलिस के साथ खुफिया विभाग भी सक्रिय रहा। जम्मू-कश्मीर सरकार देती थी बंदियों का बजट जम्मू-कश्मीर से यहां लाकर रखे गए बंदियों के खाने-पीने का बजट उस समय वहां की सरकार देती थी। बंदियों पर खर्च होने वाली रकम का वह हर महीने बजट जारी करती थी। सरकार द्वारा पिछले दिनों कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद माना जा रहा है कि बंदियों को इस बार वहां से बजट जारी नहीं किया जाएगा।

   

   

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Posted By: Tanu Gupta

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