आगरा, अली अब्बास। जिला जेलों में यूं तो दबंग अपराधियों का दबदबा होने की बात लोग अक्सर सुनते रहते हैं। ये दबंग और शातिर अपराधी अपने साथ बैरक में बंद दूसरे बंदियों पर हुक्म चलाने का प्रयास करते हैं। मगर, जेलों में बंदियों की एक बैरक ऐसी भी होती है, जहां दबंग और कुख्यात अपराधी को नहीं रखा जाता। उन्हें इन बंदियों से दूर रखा जाता है। जिससे कि वह दबंग और कुख्यात बंदियों की संगत में आकर कहीं उनके रास्ते पर न चल पड़ें और अपराध के दलदल में फंस जाएं।

ये रहती है आशंका

हर जेल में एक सामान्य बैरक होती है। जिसमें 18 से 21 वर्ष की उम्र के विभिन्न मामलों में आरोपित विचाराधीन बंदियों को रखा जाता है। युवा होने के चलते इन बंदियों के सुधरने की संभावना और गलत रास्ते पर चलने दोनों की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। जिस के चलते जेल प्रशासन इन बंदियों को शातिर और कुख्यात अपराधियों से बिल्कुल दूर रखता है। इस बैरक में सिर्फ 18 से 21 वर्ष की उम्र के विचाराधीन युवा बंदी ही रह सकते हैं।

युवा बंदियों की शिक्षा पर जोर

आगरा जिला जेल की सामान्य बैरक में वर्तमान में तीन दर्जन से अधिक युवा बंदी हैं। इन बंदियों को पढ़ाने के लिए बैरक में नियमित रूप से एक शिक्षक आते हैं। वह युवा बंदी जिनकी पढाई किसी कारणवश बीच में छूट गई है। वह आगे की पढाई करना चाहते हैं, तो शिक्षक और जेल प्रशासन उनकी करता है। उन्हें हाई स्कूल और इंटरमीडिएट से लेकर उच्च शिक्षा तक हासिल करने में मदद करता है। जिससे कि वह यहां रहकर पढाई के बाद जब बाहर जाएं तो शिक्षित होने के चलते समाज में खुद को पुर्नस्थपित कर सकें। इसके साथ ही इन युवा बंदियों को नियमित रूप से योग कराया जाता है। जिससे कि उनमें एकाग्रता आए और वह खुद को बेहतर तरीके से समाज में पेश कर सकें।

सामान्य बैरक में वर्तमान में 18 से 21 वर्ष की उम्र के तीन दर्जन से अधिक युवा बंदी हैं। इन बंदियों के लिए नियमित शिक्षक भी लगा हुआ है। सुबह उन्हें योग कराया जाता है।

पीडी सलौनिया  जिला जेल अधीक्षक 

Edited By: Tanu Gupta

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