आगरा, जागरण संवाददाता। सब्जियाें के राजा पर इस साल संकट है। आलू की प्रमुख उत्पादक आगरा बेल्ट में कोल्ड स्टोरेज अभी तक पुरानी फसल भरे पड़े हैं। जबकि इस समय तक कोल्ड स्टोरेज खाली हो जाने चाहिए थे। नया आलू बोने का समय भी नजदीक आ चुका है। किसान भी परेशान हैं और कोल्ड स्टोरेज स्वामी भी। बाजार में पूरी गर्मी निकल जाने के दौरान आलू का भाव स्थिर ही रहा। जबकि यहां से इस साल किसान स्पेशल ट्रेन से बड़े पैमाने पर आलू को आसाम भी भेजा जा चुका है, उसके बावजूद पुराना स्टॉक ठिकाने नहीं लग पाया। माना जा रहा है कि अब कुछ दिनाें में बाजार में आलू का भाव एकदम से गिरेगा।

31 अक्टूबर तक चलते हैं कोल्ड स्टोरेज

आलू की निकासी रफ्तार नहीं पकड़ रही है, जिस कारण एक बार फिर भंडारित फसल के सामने संकट खड़ा होने की आशंका है। 31 अक्टूबर शीतगृह संचालन की अंतिम तिथि है, लेकिन कुल भंडारित पौन पांच करोड़ पैकेट (प्रति 50 किलोग्राम) में से 45 प्रतिशत अभी शीतगृह में है। 15 अक्टूबर से नई फसल की बोवाई शुरू हो जाएगी और 10 नवंबर तक ऊना, पंजाब की फसल बाजार में आ जाएगी। ऐसे में किसानों के सामने फिर संकट खड़ा होगा।

प्रतिदिन 500 ट्रक जाते हैं आलू लेकर

आगरा में 71 हजार हेक्टेअर में आलू का उत्पादन होता है और प्रतिदिन 450 से 500 ट्रक आलू लेकर दिल्ली, महाराष्ट्र सहित दूसरी मंडियों में जाते हैं। अगस्त में हासन की फसल बाजार में आई, जिसने कर्नाटक की स्थानीय मंडी के साथ दिल्ली मंडी तक पर कब्जा जमा लिया था। ऐसे में स्थानीय आलू की मांग घटी थी और पिछले दिनों निकासी में शिथिलता आई थी। बोवाई में 18 से 20 फीसद आलू का प्रयोग होता है, लेकिन 25 फीसद आलू अभी संकट बना हुआ है।

700 से 800 रुपये पैकेट है भाव

खंदौली के किसान विनोद कुमार ने बताया कि फसल पर आलू का भाव 500 रुपये पैकेट (प्रति 50 किलोग्राम) था, लेकिन इसके बाद दामों में निरंतर इजाफा हुआ है। फिलहाल 700 से 800 रुपये प्रति पैकेट भाव पहुंच गया है। अभी दाम और बढ़ने की उम्मीद बनी हुई है।

सिकंदरा मंडी में 1400 कुंतल की होती है खपत

सिकंदरा फल एवं सब्जी मंडी में प्रतिदिन एक हजार से 1400 कुंतल आलू की खपत हो रही है। थाेक में भाव 12 से 14 रुपये प्रति किलोग्राम भाव गुणवत्ता के आधार पर बने हुए हैं। वहीं फुटकर बाजार में 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक आलू का भाव है।

कई राज्यों में जाता है आलू

1500 पैकेट शीतगृह में भंडारित है। निकासी का मन बना रहे हैं, लेकिन अभी मूल्य वृद्धि का इंतजार है। दामों में तेजी बनी है और इजाफा होने की उम्मीद है।

विजय सिंह, किसान

45 प्रतिशत आलू भंडारित है। किसानों को आलू निकासी में रफ्तार बढ़ानी होगी। दूसरे राज्यों की फसल आने पर भंडारित फसल फंस जाएगी।

राजेश गोयल, अध्यक्ष, आल इंडिया कोल्ड स्टोरेज आनर्स एसोसिएशन

शीतगृह से अभी आधी निकासी हुई है। विभिन्न राज्यों की फसल समय-समय पर आती रहती है, जिससे मांग में समय-समय पर अंतर रहता है। किसानों ने निरंतर निकासी करनी चाहिए, जिससे आलू पर संकट नहीं आएगा।

कौशल कुमार, उप निदेशक उद्यान

Edited By: Prateek Gupta

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